
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस पर हमलावर हुई बीजेपी, हॉर्स ट्रेडिंग का लगाया आरोप
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर चुनावी मर्यादाओं का उल्लंघन करने और खरीद-फरोख्त की राजनीति करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने कांग्रेस के आरोपों का पलटवार करते हुए कहा कि जो पार्टी खुद अपने विधायकों को संभाल नहीं पा रही है, वही दूसरों पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा रही है, लेकिन उसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक संख्या बल उसके पास कहां से आ रहा है। आदित्य साहू ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस के पास पर्याप्त समर्थन है तो फिर उसे अपने विधायकों को दूसरे राज्यों में ले जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों का किया जिक्र
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी जोड़-तोड़ और अनैतिक राजनीतिक हथकंडों में विश्वास नहीं करती। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee का उदाहरण देते हुए कहा कि अटल जी की सरकार एक वोट से गिर गई थी, लेकिन उन्होंने कभी सत्ता बचाने के लिए अनैतिक रास्ता नहीं अपनाया।
आदित्य साहू ने कांग्रेस पर अपने ही कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने और बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के हितों पर ध्यान देना चाहिए।
परिमल नाथवाणी के समर्थन में उतरी बीजेपी
बीजेपी ने राज्यसभा उम्मीदवार Parimal Nathwani का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि नाथवाणी पहले भी दो बार झारखंड का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में कर चुके हैं और उनके कार्य जनता के सामने हैं। पार्टी का दावा है कि उन्होंने राज्य के विकास और औद्योगिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राज्यसभा चुनाव पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी मुकाबला लगातार दिलचस्प होता जा रहा है। एक ओर महागठबंधन अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहा है, वहीं बीजेपी और उसके समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवाणी भी राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं।
राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की नजरें मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं, जो झारखंड की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकते हैं।



