आदिवासी महाजुटान के बाद बंधु तिर्की का बड़ा ऐलान, संसद को सौंपेंगे 5 प्रस्ताव

बंधु तिर्की का बड़ा ऐलान! संसद को सौंपेंगे 5 प्रस्ताव

आदिवासी महाजुटान के बाद बंधु तिर्की का ऐलान, परिसीमन के मुद्दे को भटकने नहीं देंगे, संसद को सौंपेंगे 5 प्रस्ताव

Ranchi: आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के मुद्दे को लेकर मंगलवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के आवास पर संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान की सफलता और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बंधु तिर्की के अलावा पूर्व मेयर रमा खलखो, सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला, लक्ष्मी नारायण मुंडा, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, कांग्रेस युवा अध्यक्ष शशि पन्ना, ज्योत्स्ना केरकेट्टा और शिवा कच्छप समेत कई लोग मौजूद रहे।

आदिवासी महाजुटान को बताया सफल

बंधु तिर्की ने 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान को सफल बताते हुए इसमें शामिल लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि महाजुटान का मुख्य उद्देश्य परिसीमन के मुद्दे पर आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती से सामने रखना था।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिसीमन के मूल मुद्दे को किसी दूसरे विषय की ओर डायवर्ट नहीं होने दिया जाएगा। आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए आगे भी आवाज उठाई जाएगी।

पांचवीं अनुसूची के बावजूद विस्थापन पर सवाल

बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में पांचवीं अनुसूची के प्रावधान लागू हैं, इसके बावजूद राज्य में विस्थापन का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन, विस्थापन और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि इन मुद्दों को लेकर कानून मंत्री से मुलाकात की जाएगी। साथ ही सभी राजनीतिक दलों और राष्ट्रपति को भी ज्ञापन सौंपने की तैयारी है।

संसद को सौंपे जाएंगे पांच प्रस्ताव

बंधु तिर्की ने बताया कि आदिवासी महाजुटान में पारित पांच प्रस्ताव संसद को भी सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही इन प्रस्तावों का ड्राफ्ट संबंधित स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आदिवासी समाज की मांगों और चिंताओं को संवैधानिक एवं राजनीतिक स्तर पर रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि परिसीमन, आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पांचवीं अनुसूची से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक स्तर पर संवाद जारी रखा जाएगा।

विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग

पूर्व मंत्री ने परिसीमन के तहत झारखंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल को ध्यान में रखते हुए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

बंधु तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे की रणनीति सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद तय की जाएगी।

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