
झारखंड में पुलिस अफसरों पर ACB का शिकंजा, रिश्वत लेते कई थानेदार और SI गिरफ्तार
Ranchi: झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार जारी है। पिछले कुछ महीनों में राज्य के अलग-अलग जिलों में पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले सामने आए हैं। ACB ने कई थाना प्रभारियों और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों को सुरक्षा देने की है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत लेने की कार्रवाई सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित मामलों में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।
गिरिडीह साइबर थाना के SI को 30 हजार रुपये लेते पकड़ा
ACB की धनबाद टीम ने 9 सितंबर 2026 को गिरिडीह साइबर थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर पुनीत कुमार गौतम के खिलाफ कार्रवाई की।
रिपोर्ट के अनुसार, ACB टीम ने उन्हें साइबर थाना के पास स्थित एक होटल के समीप 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई रिश्वत की शिकायत के बाद की गई थी।
इस मामले में ACB की कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मचा।
खूंटी महिला थाना प्रभारी 50 हजार रुपये लेते गिरफ्तार
इससे पहले 30 जुलाई 2026 को ACB ने खूंटी महिला थाना सह एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की तत्कालीन थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी सपना के खिलाफ कार्रवाई की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ACB ने उन्हें 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
महिला थाना और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट जैसे संवेदनशील जिम्मेदारी वाले पद पर तैनात अधिकारी के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया।
बंदगांव थाना प्रभारी पर भी ACB की कार्रवाई
अगस्त 2026 में पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना प्रभारी मनीष कुमार के खिलाफ भी ACB ने कार्रवाई की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, थाना प्रभारी पर एक मामले में आरोपी को मदद पहुंचाने के बदले 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। ACB ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा।
अलग-अलग जिलों में सामने आ रहे मामले
हाल के महीनों में झारखंड के विभिन्न जिलों से पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर ACB की कार्रवाई सामने आई है। इनमें थाना प्रभारी और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
इन कार्रवाइयों का उद्देश्य सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना और रिश्वत लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करना है।
ACB की कार्रवाई के बाद भी चुनौती बरकरार
ACB की लगातार कार्रवाई के बावजूद रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आना भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती को दिखाता है। खासकर पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायतें सीधे आम लोगों के न्याय और सुरक्षा से जुड़ी होती हैं।
हालांकि, किसी अधिकारी की गिरफ्तारी या उसके खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। संबंधित मामलों में अंतिम फैसला न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।



