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शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करेंगी रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन

Ranchi: झारखंड आंदोलन के महानायक, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत दिए जा रहे पद्म भूषण सम्मान को उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन और बहू कल्पना सोरेन ग्रहण करेंगी। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसकी आधिकारिक जानकारी दी है।

शिबू सोरेन को यह सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके असाधारण योगदान, आदिवासी समाज के उत्थान और पृथक झारखंड राज्य आंदोलन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका के लिए प्रदान किया जा रहा है।

झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे शिबू सोरेन

झारखंड आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप देने में शिबू सोरेन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, मूलवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और अलग झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।

उनके लंबे राजनीतिक जीवन में वे आठ बार लोकसभा सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अपने अंतिम समय तक वे राज्यसभा सदस्य के रूप में सक्रिय सार्वजनिक जीवन से जुड़े रहे।

2025 में हुआ था निधन

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके निधन के बाद झारखंड ही नहीं, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

समाज सुधारक के रूप में भी रही अलग पहचान

महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष

शिबू सोरेन ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत आदिवासियों और गरीबों के शोषण के खिलाफ आंदोलन से की थी। उन्होंने महाजनी और साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की।

शिक्षा के प्रति जागरूकता

उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए रात्रि पाठशालाओं का संचालन किया और लोगों को शिक्षित बनने के लिए प्रेरित किया।

नशामुक्त समाज का अभियान

समाज में व्याप्त नशाखोरी के खिलाफ भी उन्होंने व्यापक जनजागरण अभियान चलाया और शराबबंदी के पक्ष में कई आंदोलन किए।

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

पद्म भूषण सम्मान शिबू सोरेन के संघर्ष, नेतृत्व और सामाजिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है। यह सम्मान न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

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