HeadlinesJharkhandNationalPoliticsStates

गठबंधन में टकराव: JMM और कांग्रेस के बीच सियासी संग्राम तेज

क्या टूटेगा गठबंधन? झारखंड में JMM-कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी

झारखंड में गठबंधन में दरार? JMM-कांग्रेस आमने-सामने, सियासत गरमाई

झारखंड की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। सत्ता में साथ रहने वाली दो प्रमुख पार्टियां—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—अब एक-दूसरे पर खुलकर हमला करती नजर आ रही हैं। जो दल कल तक एक-दूसरे के “मजबूत सहयोगी” थे, आज सार्वजनिक मंचों से तीखे आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।


कहां से शुरू हुई दरार की कहानी?

इस राजनीतिक तनातनी की पटकथा अचानक नहीं लिखी गई, बल्कि इसकी नींव पहले ही पड़ चुकी थी। असल टकराव तब सामने आया जब हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव में JMM की भागीदारी की इच्छा जताई।

असम में आदिवासी वोट बैंक काफी बड़ा है, और यही JMM की रणनीति का केंद्र था। लेकिन कांग्रेस, जो वहां मुख्य विपक्षी दल है, इस कदम से असहज हो गई। उसे डर था कि JMM के मैदान में उतरने से उसका पारंपरिक वोट बैंक बंट सकता है।


असम दौरे और बढ़ती दूरी

हेमंत सोरेन के लगातार असम दौरे और वहां आदिवासी समुदाय के बीच बढ़ती सक्रियता ने कांग्रेस की चिंता और बढ़ा दी। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई रांची पहुंचे और सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत की।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखा, लेकिन समय बीतने के साथ सीटों पर सहमति नहीं बन पाई। 23 मार्च—नामांकन की आखिरी तारीख—तक भी स्थिति साफ नहीं हुई। आखिरकार JMM ने 21 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। यही वह मोड़ था, जहां से दोनों दलों के रिश्ते खुलकर बिगड़ गए।


आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इसके बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई—

  • हेमंत सोरेन ने BJP के साथ-साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा
  • JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को “विषैला सांप” तक कह दिया
  • वहीं कांग्रेस की ओर से के. राजू ने राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए
  • कांग्रेस ने झारखंड में प्रशासन और माइनिंग लॉबी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी

इतना ही नहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने हजारीबाग और धनबाद की घटनाओं को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए।


क्या गठबंधन टूटने की कगार पर?

अब सवाल यही है—क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या गठबंधन टूटने की आहट?

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो हालात सामान्य नहीं हैं। विधानसभा सत्र के दौरान जयराम महतो का यह बयान भी चर्चा में रहा कि आने वाले समय में झारखंड में “न कांग्रेस, न बीजेपी” की सरकार बन सकती है।


आगे क्या?

फिलहाल JMM और कांग्रेस के बीच तनाव खुलकर सामने आ चुका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि—

  • क्या दोनों दल मतभेद भुलाकर साथ बने रहेंगे?
  • या यह टकराव आने वाले समय में गठबंधन टूटने का कारण बनेगा?

झारखंड की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां हर बयान और हर कदम आने वाले बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button