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युद्ध का असर: रिफाइन तेल ₹45 महंगा, प्लास्टिक 40% उछला, निर्माण लागत बढ़ी

रसोई से मकान तक महंगाई, तेल महंगा, प्लास्टिक-सीमेंट के दाम चढ़े

युद्ध का असर: रिफाइन तेल ₹45 तक महंगा, प्लास्टिक उत्पादों में 40% उछाल, निर्माण लागत भी बढ़ी

रांची: वैश्विक स्तर पर जारी तनाव, खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी ने रसोई से लेकर निर्माण क्षेत्र तक महंगाई की लहर पैदा कर दी है।

खाने के तेल में तेज उछाल

क्रूड ऑयल महंगा होने से रिफाइन तेल, सनफ्लावर ऑयल और सरसों तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले एक महीने में रिफाइन तेल की कीमत ₹150-155 प्रति लीटर से बढ़कर ₹170-175 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। वहीं सनफ्लावर ऑयल ₹200 प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है।

तेल कारोबारी अर्जुन जालान के मुताबिक, आयात महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। साथ ही किसान भी ऊंचे दाम की उम्मीद में सरसों की सप्लाई सीमित कर रहे हैं, जिससे कीमतों में और तेजी की आशंका है।

प्लास्टिक और रोजमर्रा के सामान महंगे

महंगाई का असर सिर्फ खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है। प्लास्टिक और उससे बने उत्पादों की कीमतों में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पीवीसी पाइप, कैरी बैग, बेसिन, कमोड और अन्य घरेलू सामान अब पहले से काफी महंगे हो गए हैं।

व्यापारियों के अनुसार, क्रूड ऑयल महंगा होने से पॉलीमर की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे प्लास्टिक उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। पैकेजिंग लागत बढ़ने से रोजमर्रा के सामान भी महंगे हो गए हैं।

निर्माण क्षेत्र पर भी मार

निर्माण कार्य भी इस महंगाई से अछूता नहीं रहा है। पीवीसी पाइप, एसडब्ल्यूआर पाइप, सीमेंट और छड़ की कीमतों में तेज उछाल आया है।
बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य अशोक प्रधान के अनुसार, बिटुमिन (अलकतरा) की कीमत ₹40,000 प्रति टन से बढ़कर ₹54,000 प्रति टन हो गई है, यानी करीब 30-35% की वृद्धि।

इससे घर बनाने की लागत में भारी इजाफा हुआ है और निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

इंडक्शन चूल्हों की बढ़ी मांग

एलपीजी की किल्लत के कारण लोग अब इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। फरवरी में जहां 5,000 यूनिट बिके थे, वहीं मार्च में यह आंकड़ा 30,000 यूनिट तक पहुंच गया है।
बढ़ती मांग के कारण इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में 15% से 40% तक की बढ़ोतरी हुई है और कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ये आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं।

आगे और बढ़ सकती है महंगाई

विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की कमी और बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
ऐसे में आम आदमी के लिए राहत की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है

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