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स्वास्थ्य मंत्री के जिले में बदहाल अस्पताल: Jamtara सदर अस्पताल की दीवार गिरने से उठे सवाल

बारिश में गिरी जामताड़ा सदर अस्पताल की दीवार, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

Jamtara: जामताड़ा सदर अस्पताल की जर्जर दीवारें अब सिर्फ ईंट और गारे का ढांचा नहीं रहीं, बल्कि उस खोखली व्यवस्था का प्रतीक बन चुकी हैं जो “सब चंगा है” जैसे नारों के पीछे छिपी हुई है।

हैरानी की बात यह है कि जिस जिले का प्रतिनिधित्व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी करते हैं, वहीं का मुख्य सरकारी अस्पताल खुद गंभीर हालत में दिखाई दे रहा है।

सोमवार को हुई मामूली बारिश ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी। अस्पताल की दीवार का एक हिस्सा गिर गया और पिलर के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Jamtara News: भय के साये में इलाज करा रहे मरीज

अस्पताल वह जगह होती है जहां लोग जीवन बचाने की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन जामताड़ा सदर अस्पताल में मरीजों को इलाज से ज्यादा अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। मरीज और उनके परिजन इस डर के साये में रात गुजार रहे हैं कि कहीं जर्जर छत या दीवार अचानक उनके ऊपर न गिर जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल भवन की हालत लंबे समय से खराब थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब दीवार गिरने की घटना ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही और घटिया गुणवत्ता की ओर इशारा किया है।

Jamtara News: प्रशासन के बयान पर उठे सवाल

इस मामले में अस्पताल के उपाधीक्षक ने कहा कि “पिलर नहीं, सिर्फ दीवार गिरी है।”
हालांकि, इस बयान को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल की दीवार गिर रही है, तो यह खुद में एक बड़ा खतरा है।

घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

Jamtara News: बड़े नेतृत्व के बावजूद बदहाल स्थिति

विडंबना यह है कि जामताड़ा जिले का प्रतिनिधित्व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री करते हैं, इसके बावजूद जिले के मुख्य सरकारी अस्पताल की हालत चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के उन दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं जिनमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे की बात कही जाती है।

कार्रवाई की उठी मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अस्पताल भवन के निर्माण कार्य की जांच कराई जाए और यदि निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

लोगों का कहना है कि मरीजों को आश्वासन नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और मजबूत अस्पताल भवन की जरूरत है। साथ ही मुख्यमंत्री से भी इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की जा रही है।

 

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