Ranchi: Jharkhand Vidhansabha के बजट सत्र की कार्यवाही के उपरांत आज विधानसभा के प्रशासनिक समिति कक्ष में माननीय सदस्यों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
“अंडरस्टैंडिंग ऑफ बजट” (Understanding of Budget) विषय पर आधारित इस कार्यशाला का आयोजन नई दिल्ली की प्रतिष्ठित संस्था PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सहयोग से किया गया।
Jharkhand Vidhansabha: कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य
आगामी राज्य बजट को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य माननीय विधायकों को बजट निर्माण की प्रक्रिया, तकनीकी शब्दावलियों और सार्वजनिक वित्त के विभिन्न आयामों से अवगत कराना था। इससे सदस्यों को सदन में बजट पर होने वाली चर्चाओं में अधिक प्रभावी और तथ्यपरक तरीके से भाग लेने में मदद मिलेगी।
Jharkhand Vidhansabha: प्रमुख उपस्थिति और विशेषज्ञ टीम
यह कार्यशाला माननीय अध्यक्ष श्री रबीन्द्रनाथ महतो और माननीय वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुई।
PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च, नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने इस सत्र का संचालन किया:
-
श्रीमती नीरजना
-
श्रीमती यासिका केडिया
-
श्री आयुष टोप्पो
विशेषज्ञों ने बजट के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, जैसे—राजस्व घाटा, राजकोषीय नीति, आवंटन प्रक्रिया और बजटीय ऑडिटिंग पर विस्तृत जानकारियां साझा कीं।
राष्ट्रीय कार्यशाला की निरंतरता
उल्लेखनीय है कि पीआरएस (PRS) द्वारा जनवरी 2026 में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में सार्वजनिक वित्त पर एक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। झारखंड विधानसभा से तीन माननीय सदस्यों ने उस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण में भाग लिया था:
-
श्री नागेंद्र महतो
-
श्री कुमार उज्जवल
-
श्री आलोक कुमार सोरेन
उसी प्रशिक्षण की निरंतरता में आज रांची में यह कार्यशाला आयोजित की गई, ताकि राज्य के अन्य सदस्य भी इन महत्वपूर्ण जानकारियों का लाभ उठा सकें।
विधायकों के लिए क्यों जरूरी है यह प्रशिक्षण?
एक विधायक के लिए बजट को समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि:
-
निगरानी: वे अपने क्षेत्र के लिए आवंटित राशि और उसके उपयोग की बेहतर निगरानी कर सकते हैं।
-
बहस में भागीदारी: सदन के भीतर जनहित के मुद्दों पर बजट आवंटन की मांग को मजबूती से रख सकते हैं।
-
पारदर्शिता: सरकारी खर्चों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सक्षम होते हैं।
