Giridih By-Election 2026: गिरिडीह में महतो वोटरों पर नजर, JMM-BJP के सामने बड़ी चुनौती
गिरिडीह: सुदीव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट पर संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। झारखंड की प्रमुख पार्टियां अपने-अपने चुनावी समीकरण साधने में जुटी हैं। इस मुकाबले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), भारतीय जनता पार्टी (BJP), आजसू पार्टी और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की रणनीतियों पर नजर रहेगी।
खास तौर पर महतो मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश चुनावी चर्चा के केंद्र में है। आजसू प्रमुख सुदेश महतो की गिरिडीह में सभा और JLKM प्रमुख जयराम महतो की सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा ने संभावित मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, उपचुनाव की वास्तविक तस्वीर उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और चुनाव कार्यक्रम स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगी।
AJSU और JLKM की दावेदारी से दिलचस्प हुआ मुकाबला
आजसू पार्टी ने गिरिडीह विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। हाल ही में पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने यहां एक बड़ी सभा की थी। दूसरी ओर, JLKM प्रमुख और डुमरी विधायक जयराम महतो ने भी गिरिडीह सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
दोनों दलों की सक्रियता के बीच यह देखना अहम होगा कि महतो मतदाताओं के बीच कौन कितना समर्थन जुटा पाता है। हालांकि, किसी एक समुदाय के मतदाताओं का रुख एक जैसा मानना सही नहीं होगा। चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार, पार्टी संगठन और दूसरे सामाजिक समीकरण भी असर डाल सकते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में दिखी थी सीधी टक्कर
2024 के लोकसभा चुनाव में गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में आजसू के चंद्र प्रकाश चौधरी और JLKM प्रमुख जयराम महतो के बीच मुकाबला चर्चा में रहा था। चंद्र प्रकाश चौधरी ने चुनाव में जीत दर्ज की थी, जबकि जयराम महतो को करीब 3.47 लाख वोट मिले थे।
इसके बाद 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में गिरिडीह सीट से JMM के सुदीव्य कुमार सोनू विजयी हुए थे। भाजपा ने निर्भय कुमार शाहाबादी को और JLKM ने नवीन आनंद को उम्मीदवार बनाया था। नवीन आनंद को 10,787 वोट मिले थे, जबकि निर्भय कुमार शाहाबादी लगभग चार हजार वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि JLKM के कारण ही भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन पिछले चुनाव के परिणाम आगामी उपचुनाव में दलों की रणनीति और संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाते हैं।
JMM के सामने जीती हुई सीट बचाने की चुनौती
सुदीव्य कुमार सोनू के निधन के बाद JMM के सामने गिरिडीह विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बनाए रखने की चुनौती होगी। पिछले दो विधानसभा चुनावों में इस सीट पर पार्टी की जीत ने यहां उसके संगठनात्मक आधार को मजबूत दिखाया था।
राजनीतिक चर्चाओं में सुदीव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को संभावित उम्मीदवार के रूप में उतारने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। ऐसा होने पर पार्टी को सहानुभूति का लाभ मिलने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, JMM ने उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा किए बिना इस पर अंतिम तस्वीर साफ नहीं की है।
BJP की वापसी की कोशिश
भाजपा भी गिरिडीह सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी के स्टार प्रचारक मनोज तिवारी और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का क्षेत्र में दौरा चुनावी गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
2024 के विधानसभा चुनाव में हार का अंतर कम रहने के कारण भाजपा को सीट पर वापसी की उम्मीद हो सकती है। पार्टी सरकार के कामकाज, स्थानीय मुद्दों और अपने संगठन के आधार पर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, सत्ता-विरोधी माहौल कितना प्रभावी होगा, यह चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा।
गिरिडीह उपचुनाव में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?
संभावित उपचुनाव में JMM के सामने अपनी जीती हुई सीट बचाने, भाजपा के सामने वापसी करने और आजसू तथा JLKM के सामने अपनी चुनावी ताकत दिखाने की चुनौती होगी।
महतो मतदाताओं के बीच समर्थन की स्थिति, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समस्याएं और पार्टियों का जमीनी संगठन चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अभी से किसी दल की जीत या हार का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
गिरिडीह उपचुनाव का मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रह सकता। इसके नतीजे झारखंड में क्षेत्रीय दलों की स्थिति और प्रमुख राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीतियों को लेकर भी संकेत दे सकते हैं। अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा, चुनाव कार्यक्रम और मतदाताओं के फैसले के बाद ही साफ होगी।
