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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में कौन आगे? कांग्रेस और CJP की रणनीति पर सवाल

CJP के नेता तिहाड़ जेल में, राहुल गांधी का समर्थन; फिर एक मंच पर क्यों नहीं दिखे दोनों?

Rahul Gandhi vs CJP: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में कौन आगे? कांग्रेस और CJP की रणनीति पर सवाल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका चर्चा में है। एक ओर CJP के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों के लिए तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए आंदोलनकारी युवाओं को समर्थन दिया है। राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान भी किया था।

दोनों पक्षों की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक सामने आए घटनाक्रम में दोनों के एक साझा मंच पर सक्रिय होने की स्पष्ट तस्वीर नहीं दिखी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल अलग-अलग रणनीतियों का मामला है या आंदोलन के नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय को लेकर भी मतभेद हैं? फिलहाल, किसी अंदरूनी प्रतिस्पर्धा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

3 अक्टूबर को CJP ने किया था प्रदर्शन का ऐलान

इस घटनाक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर से मानी जा सकती है। उस दिन CJP ने घोषणा की थी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

CJP की लीगल सेल की प्रमुख रत्ना सिंह ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को भी आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

हालांकि, 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रमुख नेता मौके पर मौजूद नहीं दिखे। राहुल गांधी उस दिन चेन्नई में छात्रों के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद उन्होंने वीडियो जारी कर युवाओं से आंदोलन जारी रखने की अपील की और उनके साथ खड़े रहने की बात कही। हालांकि, उस संदेश में उन्होंने CJP या उसके नेताओं का नाम नहीं लिया।

राहुल गांधी ने किया सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान

12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान किया। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों और समुदायों से इसमें शामिल होने की अपील की।

जब उनसे CJP के अलग प्रदर्शन के बारे में सवाल किया गया, तो राहुल गांधी ने कहा कि यह अलग-अलग प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक ही आंदोलन है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

हालांकि, उपलब्ध विवरण के मुताबिक, राहुल गांधी के मार्च में CJP का कोई प्रमुख नेता शामिल नहीं हुआ। इससे दोनों पक्षों के बीच समन्वय और साझा मंच को लेकर सवाल उठे। लेकिन केवल एक कार्यक्रम में नेताओं की गैरमौजूदगी से किसी राजनीतिक टकराव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पेपर लीक के मुद्दे पर भी सामने आए थे मतभेद

राहुल गांधी और CJP के बीच समन्वय को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं। पेपर लीक के मुद्दे पर सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी से जंतर-मंतर आने की अपील की थी। रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी उस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

इसके बाद 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई। अगले दिन राहुल गांधी घायल छात्रों से मिलने अस्पताल पहुंचे और बाद में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना भी दिया।

उस घटनाक्रम के दौरान भी राहुल गांधी ने CJP के नेताओं का नाम नहीं लिया। दूसरी ओर, आंदोलन के मुद्दे पर सरकार की ओर से CJP के नेताओं के साथ बातचीत किए जाने का दावा किया गया। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक श्रेय और विपक्षी दलों की भूमिका पर चर्चा हुई थी।

असम की घटना के बाद भी दिखी थी दूरी

27 सितंबर को असम में एक कार्यक्रम के दौरान आशुतोष रांका और उनके साथियों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद कांग्रेस प्रवक्ता रीतम सिंह ने दावा किया था कि असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई जैसे नेताओं ने उनकी रिहाई में मदद की।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में आशुतोष रांका ने गौरव गोगोई से शिष्टाचार मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और CJP के बीच संबंधों को लेकर फिर चर्चा हुई।

इसके अलावा, 3 अक्टूबर को सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कांग्रेस का नाम लिए बिना टिप्पणी की थी कि केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि एक दूसरी पार्टी भी खुद को संविधान बचाने का ठेकेदार समझती है। इस पोस्ट को लेकर भी राजनीतिक हलकों में सवाल उठे।

क्या कांग्रेस और CJP एक साझा मंच पर आएंगे?

फिलहाल, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन में दो तरह की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। CJP ने प्रदर्शन और अपने नेताओं की गिरफ्तारी के जरिए मुद्दा उठाया है, जबकि राहुल गांधी और कांग्रेस इस विषय को SIR, कथित वोट चोरी और विपक्षी एकजुटता से जोड़कर उठा रहे हैं।

दोनों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग किए जाने के बावजूद उनकी गतिविधियों और कार्यक्रमों में समन्वय को लेकर तस्वीर स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि दोनों के बीच आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ चल रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP अपनी आंदोलन की रणनीति किस तरह आगे बढ़ाती है, कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या दोनों पक्ष किसी साझा मंच पर साथ आते हैं। फिलहाल, आंदोलन के नेतृत्व और विपक्षी एकजुटता से जुड़े सवाल खुले हुए हैं।

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