रांची में आदिवासी एकता महाजुटान आज, मोरहाबादी में जुटेंगे हजारों लोग; परिसीमन और आदिवासी अधिकारों पर होगी आवाज बुलंद
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी एकता महाजुटान महारैली का आयोजन किया जा रहा है। प्रस्तावित परिसीमन के विरोध और आदिवासी अधिकारों की रक्षा को लेकर आयोजित इस महाजुटान में राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू होगा।
सुबह से ही मोरहाबादी मैदान में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोजन स्थल पर झारखंड के महापुरुषों और नायकों की तस्वीरें लगाई गई हैं। कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पूर्व विधायक बंधु तिर्की और केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की भी मौके पर पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
विभिन्न जिलों से पहुंचेंगे आदिवासी समाज के लोग
आयोजकों के अनुसार महाजुटान में झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता बंधु तिर्की, दयामनी बरला, रमा खलखो, आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा, अजय तिर्की और शिवा कच्छप समेत कई नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
आयोजकों की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा पक्ष और विपक्ष के आदिवासी विधायकों एवं सांसदों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। मध्य प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों के आदिवासी नेताओं के भी महाजुटान में शामिल होने की बात कही गई है।
परिसीमन से आरक्षित सीटें घटने की आशंका का दावा
महाजुटान के आयोजकों का मुख्य तर्क आगामी परिसीमन को लेकर है। उनका दावा है कि यदि परिसीमन में सीटों का निर्धारण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो झारखंड में आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या घटने की आशंका हो सकती है।
बंधु तिर्की ने कहा कि वर्ष 2006-07 में भी झारखंड में परिसीमन का प्रस्ताव सामने आया था और उस समय आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या कम होने की आशंका जताई गई थी। व्यापक विरोध के बाद राज्य में परिसीमन नहीं हो सका था।
पांचवीं अनुसूची और PESA पर भी होगी चर्चा
आयोजकों का कहना है कि झारखंड पांचवीं अनुसूची वाला राज्य है। ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर विशेष चिंता है।
महाजुटान में परिसीमन के अलावा पांचवीं अनुसूची, PESA कानून, खनन से जुड़े हालिया कानून, विस्थापन और पलायन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इन विषयों को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाने की भी बात कही गई है।
आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा पर जोर
महाजुटान के आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में माहौल बनाना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज से जुड़े संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
रविवार को मोरहाबादी मैदान में होने वाले इस महाजुटान पर झारखंड की राजनीतिक नजरें भी टिकी हैं, क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के आदिवासी नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है
