झारखंड ऊर्जा संचरण निगम पर 3,122 करोड़ का वित्तीय बोझ! 1,417 करोड़ सिर्फ ब्याज में जाएगा, बढ़ता कर्ज बना बड़ी चुनौती
Ranchi: झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (JUSNL) ने अगले पांच वर्षों के लिए अपनी वित्तीय योजना तैयार की है। इस योजना में सामने आए आंकड़े कंपनी की बढ़ती वित्तीय देनदारियों और ब्याज के बोझ की तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में कंपनी का लोन, ब्याज, कर्मचारियों पर खर्च, ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस और अन्य वित्तीय दायित्व लगातार बढ़ने का अनुमान है।
सबसे बड़ी चिंता कंपनी के बढ़ते कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज है। वित्तीय वर्ष 2030-31 के अंत तक शुरुआती लोन का आंकड़ा करीब 17,007.93 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अवधि में कंपनी को केवल ब्याज के रूप में करीब 1,417.15 करोड़ रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।
कर्ज का बढ़ता बोझ बनी सबसे बड़ी चुनौती
कंपनी की वित्तीय योजना के अनुसार, पूंजीगत कार्यों के लिए राज्य सरकार के फंड और विश्व बैंक से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य सरकार के फंड पर करीब 13 प्रतिशत ब्याज है, जबकि विश्व बैंक से मिलने वाले फंड पर ब्याज दर करीब 2.5 प्रतिशत बताई गई है। विश्व बैंक की राशि में 70:30 के लोन-इक्विटी अनुपात का प्रावधान है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के आधार पर कंपनी की भारित औसत ब्याज दर 8.40 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में कंपनी के पास करीब 8,197.20 करोड़ रुपये का शुरुआती लोन रहने का अनुमान है। इसी वर्ष करीब 1,331.95 करोड़ रुपये का नया कैपेक्स लोन लेने की योजना है। इसके चलते अनुमानित ब्याज लागत करीब 732.52 करोड़ रुपये बैठती है।
वहीं, 2030-31 तक शुरुआती लोन का आंकड़ा बढ़कर 17,007.93 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। उस समय सिर्फ ब्याज का सालाना बोझ करीब 1,417.15 करोड़ रुपये हो सकता है।
कर्मचारियों के खर्च में भी लगातार बढ़ोतरी
कंपनी की पांच वर्षीय योजना में कर्मचारियों से जुड़े खर्च में भी लगातार बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। इसमें 8वें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना और मुद्रास्फीति के 3.69 प्रतिशत फैक्टर को आधार बनाया गया है।
अनुमान के मुताबिक:
- 2026-27: 202.72 करोड़ रुपये
- 2027-28: 238.28 करोड़ रुपये
- 2028-29: 261.62 करोड़ रुपये
- 2029-30: 269.87 करोड़ रुपये
- 2030-31: 278.42 करोड़ रुपये
इसके अलावा करीब 37.87 करोड़ रुपये प्रति वर्ष टर्मिनल बेनिफिट्स को भी खर्च में शामिल किया गया है।
ऑपरेशन और मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ेगा
कंपनी के प्रशासनिक और सामान्य खर्च में भी अगले पांच वर्षों में वृद्धि का अनुमान है। 3.98 प्रतिशत महंगाई सूचकांक को आधार बनाकर सामान्य प्रशासन और कानूनी खर्च का आकलन किया गया है।
2026-27 में इन मदों पर करीब 45.68 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 40.68 करोड़ रुपये सामान्य खर्च और 5 करोड़ रुपये कानूनी खर्च शामिल हैं।
यह खर्च 2030-31 तक बढ़कर करीब 52.02 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है।
वहीं, मरम्मत एवं रखरखाव पर 2030-31 में करीब 352.37 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इसी अवधि में ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का कुल खर्च बढ़कर करीब 682.80 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
डिप्रेशिएशन का भी बढ़ेगा बोझ
झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की नई Multi Year Tariff Regulation, 2025 के तहत कंपनी की परिसंपत्तियों पर मूल्यह्रास यानी डिप्रेशिएशन की गणना की गई है।
निर्धारित दरों के अनुसार:
- लैंड और लैंड राइट्स – 0%
- बिल्डिंग एवं सिविल वर्क्स – 2.67%
- प्लांट, मशीनरी और लाइन्स – 4.22%
- वाहन – 12.77%
कंपनी के अनुमान के मुताबिक 2030-31 तक औसत ग्रॉस फिक्स्ड एसेट्स (GFA) करीब 17,521.60 करोड़ रुपये हो जाएंगे। इसी अवधि में डिप्रेशिएशन बढ़कर करीब 738.09 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है।
नॉन-टैरिफ इनकम से सीमित राहत
कंपनी को जमीन और भवन के किराए, स्क्रैप की बिक्री, निवेश से होने वाली आय तथा कर्मचारियों और ठेकेदारों से मिलने वाले ब्याज एवं शुल्क के जरिए नॉन-टैरिफ इनकम होती है।
हालांकि, कंपनी की योजना में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमानों के आधार पर पूरे कंट्रोल पीरियड में हर साल करीब 30.31 करोड़ रुपये की नॉन-टैरिफ इनकम का अनुमान लगाया गया है।
कर्ज और ब्याज के मुकाबले यह आय काफी सीमित है। ऐसे में आने वाले वर्षों में कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कर्ज की लागत, ब्याज भुगतान और बढ़ते परिचालन खर्च का दबाव एक अहम चुनौती बना रह सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: बढ़ते कर्ज के बीच वित्तीय संतुलन कैसे बनेगा?
JUSNL की पांच वर्षीय योजना में एक ओर राज्य की ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पूंजीगत निवेश की जरूरत दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर इस निवेश के लिए लिए जा रहे कर्ज से भविष्य में ब्याज और वित्तीय दायित्व बढ़ने का अनुमान है।
ऐसे में कंपनी के सामने ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ कर्ज प्रबंधन, ब्याज लागत को नियंत्रित करने और अपनी आय बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी।
