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22 जुलाई को होगा ‘जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद’, भाषा संरक्षण पर बनेगी रणनीति

22 जुलाई को ‘जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद’ आयोजित होगा, जिसमें भाषा संरक्षण, शिक्षकों की बहाली और अलग बजट जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को लेकर आयोजित जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा कॉन्क्लेव–2026 की समीक्षा बैठक रविवार को पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की की अध्यक्षता में उनके रांची स्थित आवास पर सम्पन्न हुई। बैठक में कॉन्क्लेव की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए आगामी कार्यक्रमों और भाषा संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कॉन्क्लेव की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बनी समिति

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा कॉन्क्लेव–2026 की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाए। समिति में डॉ. कुमारी शशि, डॉ. बन्दे खलखो, डॉ. दिनेश दिनमणि, डॉ. बसंत कुमार बीना, आदर्श पांडेय, जगदीश उरांव, रचना हारो, विक्की मेंस और कृष्णा हेंब्रम को सदस्य बनाया गया है।

22 जुलाई को होगा ‘जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद’

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 22 जुलाई 2026 को तर राय हॉल में “जनजाति एवं क्षेत्रीय भाषा संवाद” का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हरी कुणाल होंगे। कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी, साहित्यकार, लेखक और विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 160 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा

संवाद कार्यक्रम में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को लेकर कई अहम विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के लिए पृथक बजट की व्यवस्था
  • शिक्षकों की बहाली
  • जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संरक्षण समिति का गठन
  • छात्र वेलफेयर समिति का गठन
  • भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय

शिक्षाविदों और साहित्यकारों की रही मौजूदगी

समीक्षा बैठक में डॉ. हरि उरांव, डॉ. वृन्दावन महतो, श्रीमती शकुंतला मिश्रा, डॉ. खालिक अहमद, डॉ. बन्दे खलखो, डॉ. कुमारी शशि, डॉ. दिनेश दिनमणि, डॉ. अरुण अमित तिग्गा, बिनाधर सांडिल, जगदीश उरांव, लेबयन मुण्डू सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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