
JPSC वन अधिकारी नियुक्ति रद्द करने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रोक से इनकार; सरकार से मांगा जवाब
Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने असिस्टेंट फॉरेस्ट कंजर्वेटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
अदालत के इस फैसले से नियुक्ति रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों को फिलहाल अंतरिम राहत नहीं मिली है।
नियुक्ति रद्द करने के आदेश को चुनौती
असिस्टेंट फॉरेस्ट कंजर्वेटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर की नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से आग्रह किया गया कि जिस तरह कुछ अन्य मामलों में नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगाई गई है, उसी तरह इस मामले में भी अंतरिम राहत दी जाए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आशंका जताई गई कि यदि सरकार नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर देती है, तो उनका मामला और जटिल हो सकता है।
कोर्ट ने कहा- नई भर्ती निकली तो हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर सकते हैं
सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल सरकारी आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के लिए विज्ञापन जारी किया जाता है, तो याचिकाकर्ता मामले में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल कर सकते हैं।
अदालत ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब मांगा है।
24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। तब सरकार की ओर से अदालत में अपना पक्ष और जवाब दाखिल किया जाएगा।
फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद नियुक्ति रद्द करने संबंधी सरकारी निर्णय पर रोक नहीं लगी है।
अन्य JPSC परीक्षाओं पर भी कोर्ट में सुनवाई
झारखंड में JPSC की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर भी कई याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं।
कुछ मामलों में नियुक्ति हो चुकी है, जबकि कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया अभी अलग-अलग चरणों में थी। जिन परीक्षाओं में नियुक्तियां हो चुकी थीं, उनमें से कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने सरकार के रद्दीकरण आदेश पर रोक लगाई है।
वहीं, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



