असम चुनाव में Hemant Soren का केंद्र पर हमला, बोले- ‘हमें रोकना लोकतंत्र का गला घोंटना

हमें रोका गया, लेकिन झुकेंगे नहीं’ – असम में हेमंत सोरेन का बड़ा बयान

असम चुनाव: ‘हमें रोकना लोकतंत्र का गला घोंटना’, हेमंत सोरेन का केंद्र पर तीखा हमला

गुवाहाटी/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। जेएमएम के स्टार प्रचारक के रूप में असम पहुंचे सोरेन ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर जनता के बीच जाने से रोका गया, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नेता को रोकने की कोशिश नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने जैसा है। “क्या अब कार्यक्रमों की आड़ में जनता तक पहुंचने से भी रोका जाएगा?”—यह सवाल उठाते हुए उन्होंने केंद्र पर सीधे निशाना साधा।

झुकने की नहीं, लड़ने की राजनीति

हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में भावनात्मक अंदाज अपनाते हुए कहा कि असम की धरती संघर्ष की प्रतीक रही है। “हमारे पूर्वजों ने हमें झुकना नहीं, बल्कि लड़ना सिखाया है। हम संघर्ष से ही यहां तक पहुंचे हैं और आगे भी लड़ाई जारी रहेगी,” उन्होंने कहा।

संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप

सोरेन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज देश में संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके मुताबिक, जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब जरूर देगी।

चाय बागानों से उठ रही नई आवाज

असम के सामाजिक समीकरणों का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि अब आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग और चाय बागान के मजदूर जाग चुके हैं। “चाय बागानों के लोग अब अपने अधिकारों के लिए खड़े हो रहे हैं और उन्हें उनका हक मिलकर रहेगा,” उन्होंने कहा।

उन्होंने जेएमएम के चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ को आत्मसम्मान और पहचान का प्रतीक बताते हुए समर्थकों से एकजुट होने की अपील की।

वोट की ताकत से जवाब देने की अपील

अपने भाषण के अंत में सोरेन ने जनता से 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्षों के शोषण और अन्याय का जवाब अब वोट की ताकत से दिया जाना चाहिए।


यह बयान ऐसे समय आया है जब असम में चुनावी माहौल चरम पर है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

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