असम की राजनीति में घमासान, Rahul Gandhi ने हिमंत बिस्वा सरमा को बताया ‘देश का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री’

असम की सियासत में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने उन्हें न केवल भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया, बल्कि सांप्रदायिकता फैलाने का भी आरोप लगाया है।

राहुल गांधी के गंभीर आरोप: “सजा तय है”: Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा देश के सबसे भ्रष्ट और सांप्रदायिक मुख्यमंत्री हैं। उनके अनुसार:

  • मुख्यमंत्री ने असम की जनता के भरोसे को तोड़ा है।

  • जनता को गुमराह कर अपनी सत्ता चलाई है।

  • भ्रष्टाचार के सबूत अब सार्वजनिक हो चुके हैं और इसके लिए उन्हें सजा भुगतनी होगी।

पासपोर्ट विवाद: क्या मुख्यमंत्री की पत्नी के पास है दोहरी नागरिकता?: Rahul Gandhi

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी रिनिकी भुइंया सरमा पर ‘पासपोर्ट धोखाधड़ी’ के गंभीर आरोप लगाए हैं:

  1. तीन पासपोर्ट का दावा: पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कथित तौर पर दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट कैसे हैं?

  2. कानूनी उल्लंघन: भारतीय कानून के अनुसार कोई भी नागरिक दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) नहीं रख सकता। कांग्रेस का सवाल है कि क्या उनके पास भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ विदेशी पासपोर्ट भी हैं?

  3. संपत्तियों का खुलासा: एपीसीसी अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री दंपत्ति ने अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है और असम का पैसा विदेशी बैंक खातों में भेजे जाने की जांच होनी चाहिए।

“मुस्लिम विरोध और विदेशी पासपोर्ट” पर घेराबंदी: Rahul Gandhi

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की राजनीतिक विचारधारा पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ हिमंत बिस्वा सरमा की पूरी राजनीति मुस्लिम विरोध और नफरत पर आधारित है, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के पास मुस्लिम देशों के पासपोर्ट होने के दावे चौंकाने वाले हैं। कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

निष्कर्ष और राजनीतिक निहितार्थ

इन आरोपों ने असम की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक और नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है, वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। यदि इन आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो यह मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकता है।

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