जगरनाथ महतो की पुण्यतिथि: ‘टाइगर’ जिसने जमीन से जुड़कर राजनीति की, मोदी लहर में भी कायम रखा दबदबा
झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री Jagarnath Mahto की पुण्यतिथि पर पूरा राज्य उन्हें याद कर रहा है। एक छोटे से गांव से निकलकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले ‘टाइगर’ की कहानी संघर्ष, सादगी और जनसेवा की मिसाल है।
🔹 साधारण कार्यकर्ता से जननायक बनने तक का सफर
चंद्रपुरा प्रखंड के सिमराकुली गांव में जन्मे Jagarnath Mahto ने 80 के दशक में झामुमो के एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखा।
धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया, जो हमेशा जनता के बीच रहा और उनके मुद्दों को अपनी आवाज बनाया।
🔹 90 के दशक में संघर्ष से बनी पहचान
उनकी पहचान 90 के दशक में तब बनी जब उन्होंने भंडारीदह रिफैक्ट्रीज प्लांट में ‘फायर क्ले’ परिवहन घोटाले का खुलासा किया।
दबाव, धमकी और पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे पीछे नहीं हटे। यही जुझारूपन उन्हें आम नेताओं से अलग बनाता था।
कोयलांचल क्षेत्र में मजदूरों, विस्थापितों और ग्रामीणों के हक की लड़ाई लड़ते हुए वे ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर हुए।
🔹 डुमरी के ‘अजेय योद्धा’
2005 से 2019 तक Jagarnath Mahto लगातार डुमरी विधानसभा सीट से जीतते रहे।
यहां तक कि 2014 की जबरदस्त ‘मोदी लहर’ भी उनके किले को नहीं तोड़ सकी। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को भारी अंतर से हराकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे सिर्फ नेता नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख के साथी थे।
🔹 जमीन से जुड़े नेता की पहचान
जगरनाथ महतो की सादगी और जनसरोकार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
- गांव में खुद बिजली के खंभे ढोना
- सुबह-सुबह बच्चों को पढ़ने के लिए जगाना
- मजदूरों के साथ खड़े रहना
ये सब उनके व्यक्तित्व को खास बनाते थे।
🔹 CNT-SPT और स्थानीय मुद्दों पर मुखर आवाज
झारखंड अलग राज्य आंदोलन से लेकर CNT-SPT Act और स्थानीय नीति तक, वे हमेशा मुखर रहे।
विधानसभा में उन्होंने पारा शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्थानीयता (1932 खतियान) जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया।
🔹 अंतिम समय तक जनसेवा
कोरोना संक्रमण और फेफड़े के प्रत्यारोपण जैसी गंभीर स्थिति के बाद भी उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा।
वे अक्सर कहा करते थे कि “जनता के बीच रहना ही मेरी जिंदगी है।”
उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम भी हो सकती है।
🔻 निष्कर्ष
Jagarnath Mahto का जीवन संघर्ष, साहस और जनसेवा की ऐसी कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
झारखंड की माटी का यह ‘टाइगर’ भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी आवाज, उनके संघर्ष और उनकी सोच हमेशा जिंदा रहेगी।
