नालंदा में NIA-ATS की बड़ी कार्रवाई: AK-47 कारतूस कनेक्शन में 6 ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड
बिहार के नालंदा जिले में सोमवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब National Investigation Agency (NIA) और Bihar ATS की संयुक्त टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी।
सुबह करीब 4 बजे 10 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची टीम ने शहर के पोस्ट ऑफिस मोड़ स्थित पीके गन हाउस समेत कुल 6 स्थानों को घेर लिया।
🔹 गन हाउस में दस्तावेज और स्टॉक की जांच
सबसे बड़ी कार्रवाई बिहारशरीफ के लहेरी थाना क्षेत्र स्थित पीके गन हाउस एंड संस पर की जा रही है।
टीम यहां हथियारों के स्टॉक, लाइसेंस और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। छापेमारी की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई जा रही है, जिससे किसी भी तरह की चूक न हो।
🔹 AK-47 कारतूस कनेक्शन से जुड़ा मामला
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई मोहम्मद परवेज आलम से जुड़े केस में हो रही है।
करीब चार महीने पहले परवेज के पास से 1300 कारतूस बरामद किए गए थे, जिनमें 153 गोलियां AK-47 राइफल की थीं। इसके अलावा अन्य हथियारों के भी बड़ी संख्या में कारतूस मिले थे।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
🔹 6 ठिकानों पर एक साथ दबिश
छापेमारी सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जिले के कई इलाकों में की जा रही है, जिनमें शामिल हैं:
- बिहारशरीफ (पीके गन हाउस)
- मिर्जापुर (चीकसौरा थाना क्षेत्र)
- राममूर्ति नगर (हिलसा थाना क्षेत्र)
- सकरी गांव (इस्लामपुर थाना क्षेत्र)
इन ठिकानों का संबंध हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संदिग्ध लोगों से बताया जा रहा है।
🔹 100 पुलिस अधिकारियों की तैनाती
इस बड़े ऑपरेशन के लिए करीब 100 पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम बनाई गई थी।
खास बात यह है कि स्थानीय पुलिस को भी पहले से पूरी जानकारी नहीं दी गई थी, ताकि ऑपरेशन पूरी तरह गोपनीय रखा जा सके।
छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और मीडिया को भी दूरी बनाए रखने को कहा गया है।
🔹 पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी 4 दिसंबर 2025 को NIA ने नालंदा में छापेमारी की थी।
वहीं जून 2025 में पुलिस ने एक बड़े अभियान के दौरान सैकड़ों जिंदा कारतूस बरामद किए थे, जिससे इस इलाके में हथियार तस्करी के बड़े नेटवर्क की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी।
🔻 निष्कर्ष
नालंदा में चल रही यह कार्रवाई सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि अवैध हथियारों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि इस सिंडिकेट के तार कहां-कहां तक जुड़े हैं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
