बंगाल में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’: Mamata Banerjee बनवाएंगी भव्य ‘महाकाल मंदिर’
admin
बंगाल में 'सॉफ्ट हिंदुत्व': Mamata Banerjee बनवाएंगी भव्य 'महाकाल मंदिर'
कोलकाता/सिलीगुड़ी: Mamta Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी (माटीगाड़ा) में एक भव्य महाकाल मंदिर बनवाने का ऐलान कर सभी को चौंका दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे ममता बनर्जी की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और ‘बंगाली अस्मिता’ के संगम वाली एक मास्टरस्ट्रोक रणनीति मान रहे हैं।
बंगाल में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’: Mamata Banerjee बनवाएंगी भव्य ‘महाकाल मंदिर’
Mamata Banerjee: मंदिर निर्माण की बड़ी योजना
ममता बनर्जी ने 29 दिसंबर 2025 को न्यू टाउन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस महाप्रोजेक्ट का खुलासा किया।
भव्य स्वरूप: यह मंदिर लगभग 25 एकड़ की विशाल जमीन पर बनेगा। इसमें क्षेत्र की सबसे ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
शिलान्यास: मुख्यमंत्री जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में इस मंदिर की आधारशिला रखेंगी।
विकास का मॉडल: इसे केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल सके।
चुनावी गणित: क्यों पड़ा ‘महाकाल’ का दांव?
2026 के चुनाव से ठीक पहले इस घोषणा के पीछे कई गहरे राजनीतिक कारण छिपे हैं-
भाजपा के ‘तुष्टीकरण’ कार्ड का जवाब: भाजपा लगातार टीएमसी पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप लगाती रही है। दीघा के जगन्नाथ मंदिर और अब महाकाल मंदिर के जरिए ममता बनर्जी खुद को ‘हिंदू संरक्षक’ के रूप में मजबूती से पेश कर रही हैं।
उत्तर बंगाल में सेंधमारी: उत्तर बंगाल पारंपरिक रूप से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। सिलीगुड़ी के पास मंदिर बनवाकर ममता सीधे तौर पर भाजपा के वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती हैं। ‘जय श्री राम’ बनाम स्थानीय परंपरा: ममता बनर्जी भाजपा के धार्मिक नैरेटिव के मुकाबले बंगाल की स्थानीय शिव और शाक्त (दुर्गा पूजा) परंपराओं को खड़ा कर रही हैं, जिसे वे ‘बंगाली अस्मिता’ से जोड़ती हैं।
भाजपा का पलटवार: ‘चुनावी नौटंकी’
भाजपा ने मुख्यमंत्री के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व का कहना है कि यह केवल एक ‘चुनावी नौटंकी’ है। भाजपा नेताओं के अनुसार, चुनाव पास आते ही ममता बनर्जी को भगवान याद आ रहे हैं ताकि वे भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और संदेशखाली जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटका सकें।