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संजीव कुमार लाल की सेवा में वापसी, जितेंद्र मुण्डा को भी राहत; कार्मिक विभाग ने जारी किए आदेश

झारखंड: पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पूर्व आप्त सचिव संजीव कुमार लाल निलंबन मुक्त, जितेंद्र मुण्डा के खिलाफ कार्रवाई भी रद्द

पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पूर्व आप्त सचिव संजीव कुमार लाल निलंबन मुक्त, जितेंद्र मुण्डा के खिलाफ कार्रवाई भी हुई रद्द

Ranchi: झारखंड सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के दो अधिकारियों को महत्वपूर्ण राहत दी है। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पूर्व आप्त सचिव संजीव कुमार लाल को निलंबन से मुक्त कर सेवा में बहाल कर दिया गया है। वहीं, चान्हो के पूर्व अंचल अधिकारी जितेंद्र मुण्डा के खिलाफ पूर्व में की गई दंडात्मक कार्रवाई को भी निरस्त कर दिया गया है। इस संबंध में कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

संजीव कुमार लाल को मिली सेवा में वापसी

सरकारी आदेश के अनुसार, झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार लाल को 15 मई 2026 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त कर दिया गया है। उन्हें कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

संजीव कुमार लाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 7 मई 2024 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिमांड पर लिया गया और 10 मई 2024 से निलंबित कर दिया गया था।

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि के वेतन, भत्तों और अन्य सेवा संबंधी मामलों पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रकरण के न्यायिक परिणाम के आधार पर अलग से लिया जाएगा।

जितेंद्र मुण्डा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई समाप्त

दूसरा मामला चान्हो (रांची) के तत्कालीन अंचल अधिकारी जितेंद्र मुण्डा से जुड़ा है।

उन पर आरोप था कि उन्होंने एक एसएआर (SAR) अपील से जुड़े स्थगन आदेश की कथित अवहेलना करते हुए एक पक्ष को भूमि पर कब्जा दिलाया था। इस मामले में वर्ष 2012 में सरकार ने उनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव (Non-cumulative Effect) से रोकने की सजा दी थी। बाद में उनकी विभागीय अपील भी खारिज कर दी गई थी।

हाईकोर्ट और खंडपीठ से मिली राहत

जितेंद्र मुण्डा ने इस कार्रवाई को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 11 मई 2023 को एकलपीठ ने सरकार के दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया।

इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को खंडपीठ (LPA) में चुनौती दी, लेकिन 23 जून 2026 को खंडपीठ ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि विभागीय कार्रवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का समुचित पालन नहीं किया गया था।

कार्मिक विभाग ने जारी किया नया आदेश

हाईकोर्ट और खंडपीठ के निर्णय के अनुपालन में कार्मिक विभाग ने अब आधिकारिक रूप से वह आदेश भी रद्द कर दिया है, जिसके तहत जितेंद्र मुण्डा की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं। साथ ही उनकी विभागीय अपील खारिज करने वाला पूर्व आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।

दोनों मामलों में जारी सरकारी आदेशों के बाद झारखंड प्रशासनिक सेवा के इन अधिकारियों को अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक राहत मिली है। वहीं, संजीव कुमार लाल से संबंधित मूल मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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