
रांची: रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में आयोजित 39वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन में संवेदनशीलता, विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाने का संदेश दिया।
समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान कुल 3,353 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। वहीं, गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
डिग्री शुरुआत है, असली परीक्षा अब शुरू
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षा शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि शिक्षा को वास्तविक जीवन में उतारने की शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय से निकलने के बाद वे जीवन की ऐसी पाठशाला में प्रवेश कर रहे हैं, जहां हर परिस्थिति उनके सामने नई चुनौती लेकर आएगी। ऐसे में उनके निर्णय और कर्म ही उनकी वास्तविक पहचान बनाएंगे।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को असफलता से निराश नहीं होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता हमेशा रास्ता रोकने वाली दीवार नहीं होती, बल्कि कई बार यह बेहतर दिशा तलाशने का अवसर भी देती है।
उन्होंने सफलता के समय विनम्र रहने और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने पर जोर दिया।
ज्ञान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी जरूरी
राज्यपाल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि देश की प्रगति केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकती। विज्ञान, तकनीक, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ ही देश मजबूत बनेगा।
उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को अपने मौलिक विचारों और नवाचार के जरिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता जीवन को गति देती है, जबकि संस्कृति और परंपराएं उसे सही दिशा देने का काम करती हैं।
‘मैंने क्या पाया’ के साथ ‘समाज को क्या दिया’ भी सोचें
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में केवल यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है कि उन्होंने क्या हासिल किया, बल्कि यह भी विचार होना चाहिए कि उन्होंने समाज को क्या दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग देश और समाज के विकास में करने का आह्वान किया।
71 गोल्ड मेडल में छात्राओं का दबदबा
दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 58 विद्यार्थियों को कुल 71 गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। इनमें 44 गोल्ड मेडल छात्राओं ने हासिल किए।
इससे पहले कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने स्वागत भाषण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत विश्वविद्यालय में लागू चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
नए पुस्तकालय और ऑडिटोरियम का प्रस्ताव
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने विश्वविद्यालय परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार नए पुस्तकालय को विद्यार्थियों को समर्पित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने दीक्षांत मंडप को अत्याधुनिक ऑडिटोरियम में बदलने का प्रस्ताव भी रखा।
समारोह में विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित किया गया।



