नई दिल्ली – S-400: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में भारत ने अपनी वायु सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
इस दौरान S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम ने एक बार फिर साबित किया कि क्यों इसे दुनिया की सबसे प्रभावशाली वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है।
गुरुवार रात पाकिस्तान ने एक साथ 15 से अधिक भारतीय सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की। जम्मू, पठानकोट, जैसलमेर, उधमपुर और अमृतसर जैसे शहरों को टारगेट किया गया, लेकिन भारतीय वायु सेना के S-400 सिस्टम ने दुश्मन की हर एक चाल को विफल कर दिया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में S-400 के साथ-साथ अन्य आधुनिक प्रणाली जैसे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और मानवरहित विमान रोधी सिस्टम (Anti-UAV Systems) का इस्तेमाल किया गया। भारतीय वायु सेना ने ‘काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक’ दोनों क्षमताओं का प्रयोग करते हुए दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन को सीमा पार भी जवाब दिया।
क्या है S-400 ट्रायम्फ?
S-400 ट्रायम्फ, रूस का विकसित किया गया एक अत्याधुनिक Surface-to-Air Missile System है, जिसे भारत ने 2018 में $5.43 बिलियन की डील के तहत खरीदा था। यह सिस्टम 600 किमी तक लक्ष्य को ट्रैक करने और 400 किमी दूर तक दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही खत्म करने में सक्षम है। भारत ने इसे “सुदर्शन चक्र” नाम दिया है।
कौन-कौन से देश करते हैं S-400 का इस्तेमाल?
- भारत – पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनाती
- रूस – मूल निर्माता और सबसे बड़ा उपयोगकर्ता
- चीन – भारत का पड़ोसी और रणनीतिक प्रतिद्वंदी
- तुर्की – NATO सदस्य, लेकिन रूस से खरीदा
- बेलारूस – सीमित इस्तेमाल
अन्य देशों जैसे सऊदी अरब और ईरान ने भी रुचि दिखाई है
भारत के लिए रणनीतिक अहमियत
भारत के लिए S-400 केवल एक हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रमुख माध्यम बन गया है, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे दोहरे मोर्चे की स्थिति में। मौजूदा संघर्ष में जब पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से हमले तेज किए, तब S-400 ने एक “अदृश्य ढाल” की तरह भारत की सुरक्षा की। इस तकनीकी बढ़त ने भारत को न केवल सैन्य रूप से बढ़त दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक मजबूती भी दिलाई है।
