Jharkhand News: हाथियों के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, झारखंड समेत 4 राज्य बने पक्षकार

Elephant Conservation: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मानव-हाथी संघर्ष का मामला

Jharkhand News: एशियाई हाथियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका सेव एलीफेंट फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई है। मामले में केंद्र सरकार के साथ झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सरकार को भी पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं और एशियाई हाथी भोजन तथा पानी की तलाश में लगातार इन राज्यों के बीच आवाजाही करते हैं। ऐसे में हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर और प्राकृतिक मार्गों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

मानव-हाथी संघर्ष बना बड़ी चुनौती: Jharkhand News

याचिका में बताया गया है कि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ लंबे समय से मानव-हाथी संघर्ष की समस्या से जूझ रहे हैं। जंगलों की लगातार कटाई, खनन गतिविधियों और प्राकृतिक आवासों के खत्म होने के कारण हाथियों का रुख अब आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है। इसके चलते कई जगहों पर जान-माल का नुकसान हो रहा है और हाथियों की मौत के मामले भी बढ़े हैं।

बिजली तार, ट्रेन हादसे और शिकार से बढ़ रही मौतें: Jharkhand News

PIL में हाथियों की अस्वाभाविक मौतों पर भी चिंता जताई गई है। याचिका के मुताबिक

की वजह से लगातार हाथियों की मौत हो रही है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इन घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नीति बनाई जाए और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।

साझा एक्शन प्लान बनाने की मांग: Jharkhand News

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के वन विभागों और प्रशासनिक तंत्र को मिलकर एक साझा और एकीकृत एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया जाए। इस योजना का उद्देश्य हाथियों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना, कॉरिडोर को सुरक्षित रखना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना बताया गया है।

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर बढ़ी बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी भारत के जंगलों में तेजी से हो रहे खनन और वन कटाई का असर वन्यजीवों पर साफ दिखाई देने लगा है। हाथियों के लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाएं इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल यह PIL आने वाले दिनों में हाथी संरक्षण और वन्यजीव नीति को लेकर बड़ी बहस का कारण बन सकती हैI

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