
झारखंड में JJM 2.0 पर केंद्र-राज्य के बीच MOU साइन, CM हेमंत सोरेन ने उठाया 6500 करोड़ बकाये का मुद्दा
रांची: झारखंड में हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। Jal Jeevan Mission 2.0 के तहत झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।
राजधानी रांची में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil और मुख्यमंत्री Hemant Soren मौजूद रहे।
CM हेमंत सोरेन ने उठाया 6500 करोड़ बकाये का मुद्दा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रही पेयजल योजनाओं की प्रगति और चुनौतियों को प्रमुखता से रखा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 से अब तक राज्य में 24,635 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न पेयजल योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त राशि जारी नहीं की गई।
उन्होंने लगभग 6500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने की मांग की।
“काम ज्यादा, अनुदान कम”
राज्य सरकार ने दावा किया कि झारखंड में अब तक 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्र से केवल 46 प्रतिशत अनुदान मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और विभागों से मिलने वाली NOC प्रक्रिया को तेज किया जाना जरूरी है।
जल सहियाओं के लिए भी मांगा सहयोग
राज्य सरकार ने बताया कि गांवों में सिंगल विलेज स्कीम के संचालन के लिए “जल सहिया” तैनात की गई हैं, जिन्हें 2500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।
राज्य ने इन योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहयोग की मांग भी रखी।
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल का जवाब
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के रेट्रोफिटिंग और नियमित संचालन-रखरखाव के लिए केंद्र सरकार अलग से वित्तीय सहायता नहीं देगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले अनुदान का उपयोग करना होगा।
बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।



