
झारखंड सचिवालय कर्मियों की सीनियरिटी लिस्ट जारी, 7 दिनों में दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
Ranchi: झारखंड सरकार ने झारखंड सचिवालय लिपिकीय सेवा के वरीय सचिवालय सहायकों और कनीय सचिवालय सहायकों की औपबंधिक वरीयता सूची (Seniority List) 2026 जारी कर दी है। इस सूची में वर्ष 2024 तक नियुक्त, समायोजित और प्रोन्नत कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को सूची में दर्ज विवरण या अपनी वरीयता को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह पत्र निर्गत होने की तिथि से 7 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ दावा या आपत्ति प्रस्तुत कर सकता है।
2019 के बाद पहली बार हुआ अपडेट
कार्मिक विभाग के आधिकारिक पत्र (पत्रांक 07/लि० से०-03-02/2026, का० 4649) के अनुसार, इससे पहले वर्ष 2019 में औपबंधिक वरीयता सूची प्रकाशित की गई थी।
इसके बाद नई नियुक्तियां, समायोजन, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण सूची को अद्यतन करना आवश्यक हो गया था। इसी के मद्देनजर नई औपबंधिक वरीयता सूची तैयार की गई है।
यह आदेश उप सचिव ब्रज माधव के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।
7 दिनों में दर्ज करानी होगी आपत्ति
कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों और संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे सूची को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों तक तत्काल पहुंचाएं।
विभाग ने कहा है कि:
- औपबंधिक वरीयता सूची विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है।
- 20 जुलाई से 7 दिनों के भीतर प्राप्त दावे और आपत्तियों पर ही विचार किया जाएगा।
- विभाग प्राप्त आपत्तियों की जांच कर अपनी स्पष्ट अनुशंसा और आवश्यक साक्ष्यों के साथ कार्मिक विभाग को भेजेंगे।
सूची में दर्ज हैं कर्मचारियों की पूरी जानकारी
जारी की गई सूची में वरीय एवं कनीय सचिवालय सहायकों की विस्तृत सेवा संबंधी जानकारी शामिल की गई है। इसमें—
- कर्मचारी का नाम
- पदस्थापित विभाग
- जन्म तिथि
- सेवानिवृत्ति की तिथि
- योगदान एवं संपुष्टि की तिथि
- आरक्षण श्रेणी
- शैक्षणिक योग्यता
- नियुक्ति का माध्यम (सीधी भर्ती, सीमित प्रतियोगिता परीक्षा या अनुकंपा)
जैसे सभी महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए गए हैं।
पदोन्नति प्रक्रिया को मिलेगी गति
कार्मिक विभाग का मानना है कि आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम वरीयता सूची जारी होने से सचिवालय लिपिकीय सेवा में पदोन्नति सहित अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति मिलेगी और सेवा संबंधी मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।



