2.20 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, Operation Daura Pahad में 3 AK-47 बरामद

दो दशक से अधिक समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था मिसिर बेसरा

ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’: 2.20 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार, AK-47 के साथ शीर्ष कमांडर भी चढ़े पुलिस के हत्थे

Ranchi: झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ के तहत भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और झारखंड-ओडिशा में कुल 2.20 करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ संगठन से जुड़े अन्य माओवादी कमांडरों और सहयोगियों को भी पकड़ा गया है।

पुलिस के अनुसार, 28 जुलाई को चलाए गए इस अभियान में झारखंड पुलिस, धनबाद और गिरिडीह जिला बल तथा 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम शामिल थी। सुरक्षा बलों ने धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों में कार्रवाई की।

मिसिर बेसरा के साथ शीर्ष कमांडर गिरफ्तार

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अभियान के दौरान मिसिर बेसरा के साथ मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण और गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ समेत अन्य सहयोगियों को पकड़ा गया है।

सुरक्षा बलों ने इनके पास से तीन AK-47 राइफल और 288 राउंड कारतूस बरामद करने की जानकारी दी है।

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए भी बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से झारखंड के कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख चेहरा रहा है।

मिसिर बेसरा पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का था इनाम

पुलिस के मुताबिक, मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड में एक करोड़ रुपये और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ करीब 175 नक्सली मामलों में संलिप्तता का आरोप है।

वहीं मेहनत उर्फ मोछू के खिलाफ 133 मामले दर्ज होने और झारखंड में 15 लाख रुपये का इनाम घोषित होने की जानकारी दी गई है। गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा के खिलाफ भी कई मामलों में संलिप्तता का आरोप है।

दो दशक से अधिक समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था मिसिर बेसरा

पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा का नाम वर्ष 2001 से लेकर हाल के वर्षों तक झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में हुई कई बड़ी माओवादी घटनाओं से जुड़ता रहा है।

सितंबर 2001 में हजारीबाग के ओरिया हरली जंगल में CRPF जवानों पर हुए हमले, अक्टूबर 2001 में धनबाद के तोपचांची ब्लॉक परिसर में पुलिसकर्मियों पर हमला और दिसंबर 2002 में पश्चिम सिंहभूम में हथियार लूट जैसी घटनाओं में उसकी भूमिका का आरोप रहा है।

इसके अलावा वर्ष 2003 में बोकारो के चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला, 2005 में गिरिडीह होमगार्ड शस्त्रागार से हथियारों की लूट और जहानाबाद जेल ब्रेक की साजिश में भी उसका नाम सामने आया था।

कोल्हान में कई हमलों में भूमिका का आरोप

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मिसिर बेसरा और उसके संगठन पर हाल के वर्षों में पश्चिम सिंहभूम के टोंटो, छोटानागरा, गोईलकेरा और जराइकेला समेत कई इलाकों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर IED विस्फोट और हमले करने के आरोप हैं।

जनवरी 2022 में गोईलकेरा क्षेत्र में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के अंगरक्षकों की हत्या और हथियार लूट की घटना में भी उसकी भूमिका का आरोप लगाया गया था।

लगातार सरेंडर और गिरफ्तारी से माओवादी नेटवर्क को झटका

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब झारखंड में हाल के महीनों में कई माओवादी कमांडरों और कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पकड़े गए हैं।

पुलिस का दावा है कि लगातार चल रहे संयुक्त अभियानों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के कारण राज्य में माओवादी संगठन का नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है। मिसिर बेसरा जैसे शीर्ष नेता की गिरफ्तारी को इसी अभियान की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक माना जा रहा है।

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