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हेमंत सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों को सैलरी एडवांस, वन्यजीव हमले में ₹10 लाख मुआवजा

हेमंत सरकार का मास्टर स्ट्रोक! कर्मचारियों को सैलरी एडवांस

हेमंत सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी ‘सैलरी एडवांस’ सुविधा, वन्यजीव हमले में 10 लाख मुआवजा

Ranchi: झारखंड कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों को राहत देने वाले दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यकर्मियों के लिए ‘सैलरी एडवांस एवं फाइनेंशियल वेलनेस सूट’ योजना लागू करने और जंगली जानवरों के हमले में पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत देने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को स्वीकृति दी गई।

सरकार का दावा है कि इन फैसलों से एक ओर कर्मचारियों को आपातकालीन वित्तीय सहायता आसानी से मिलेगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव हमलों से प्रभावित परिवारों को समयबद्ध मुआवजा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी सैलरी एडवांस सुविधा

नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारी आकस्मिक जरूरत पड़ने पर वेतन अग्रिम (Salary Advance) प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

योजना की प्रमुख बातें

  • 30 दिनों तक ब्याज मुक्त सैलरी एडवांस की सुविधा।
  • बड़े खर्चों के लिए वेतन के आधार पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध।
  • ईएमआई सीधे वेतन से कटेगी।
  • सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
  • पूरी प्रक्रिया डिजिटल और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी।
  • सभी राज्यकर्मी इस योजना के दायरे में आएंगे।

सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों को ऊंची ब्याज दर पर निजी कर्ज लेने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

वन्यजीव हमले में मुआवजा प्रक्रिया हुई आसान

कैबिनेट ने जंगली जानवरों के हमले से मृत्यु या गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में त्वरित राहत देने के लिए नई SOP को मंजूरी दी है।

मृत्यु की स्थिति में क्या मिलेगा?

  • तत्काल ₹1 लाख की सहायता राशि।
  • पोस्टमार्टम और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ₹4 लाख का अतिरिक्त भुगतान।
  • शेष ₹5 लाख आश्रित के नाम सावधि जमा (FD) के रूप में रखे जाएंगे।
  • आश्रित को तीन वर्षों तक प्रतिमाह ₹2,000 पेंशन भी मिलेगी।

इस प्रकार कुल आर्थिक सहायता ₹10 लाख तक होगी।

अधिकारियों के लिए तय हुई समय सीमा

नई व्यवस्था के तहत घटना की सूचना मिलने के बाद अधिकारियों के लिए समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य की गई है।

  • 6 घंटे के भीतर वन विभाग के अधिकारी को घटनास्थल पहुंचना होगा।
  • 24 घंटे के भीतर पुलिस रिपोर्ट दर्ज होगी।
  • 3 दिनों के भीतर मुआवजा स्वीकृत करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • 5 दिनों के भीतर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना होगा।

त्वरित भुगतान के लिए बनेगा कॉर्पस फंड

मुआवजा भुगतान में देरी रोकने के लिए प्रत्येक वन प्रमंडल को ₹10 लाख का कॉर्पस फंड उपलब्ध कराया जाएगा। इसी फंड से तत्काल राहत राशि जारी की जाएगी।

कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले

मंत्रिपरिषद ने कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी, जिनमें विभिन्न विभागों में सेवा नियमितीकरण, कोल ब्लॉक के लिए खनन पट्टों की स्वीकृति, अमानत बराज योजना के लिए ₹947 करोड़ से अधिक की मंजूरी, महिला हेल्पलाइन सेवा विस्तार और मोटरयान निरीक्षकों की नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि ये फैसले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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