Hazaribagh: झारखंड की राजनीति में हजारीबाग से बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। जिला कांग्रेस के सैकड़ों मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर JMM की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इनमें अधिकांश कार्यकर्ता बड़कागांव और सदर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं के इस सामूहिक दल-बदल को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि संगठन में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने और लगातार उपेक्षा महसूस होने के कारण इन कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
कांग्रेस संगठन में उपेक्षा का आरोप: JMM
सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से कांग्रेस के भीतर अल्पसंख्यक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलने की शिकायत उठती रही है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव के समय अल्पसंख्यक समुदाय को महत्व दिया जाता है, लेकिन संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व की भूमिकाओं में उन्हें उचित स्थान नहीं मिलता। इसी नाराजगी के कारण बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पार्टी से दूरी बना ली।
2029 चुनाव पर JMM की नजर: JMM
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि JMM अभी से 2029 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर रणनीति बना रही है। पार्टी खास तौर पर अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। हजारीबाग जिले में मुस्लिम मतदाताओं को संगठित कर JMM आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी स्थानीय स्तर पर नए चेहरों और प्रभावशाली कार्यकर्ताओं को जोड़ने में जुटी हुई है।
कांग्रेस के लिए बढ़ी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना आने वाले समय में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में सदर और बड़कागांव क्षेत्र के कुछ और स्थानीय नेता भी कांग्रेस छोड़ सकते हैं। इस घटनाक्रम के बाद जिले के बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सभी दलों की नजर टिकी हुई है।
