
JPSC परीक्षा में अनुवाद की बड़ी चूक, ‘डोकलो’ बना ‘ठोकलो’; अभ्यर्थियों में नाराजगी
रांची: Jharkhand Public Service Commission की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) एक बार फिर विवादों में आ गई है। रविवार को आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्र में हिंदी अनुवाद की गंभीर गलतियां सामने आई हैं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है।
सवालों में बदले शब्द, बदला अर्थ
अभ्यर्थियों के मुताबिक, झारखंड के प्रचलित शब्दों को गलत तरीके से छापा गया।
- ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’
- ‘पड़हा’ को ‘परहा’
- ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’
इतना ही नहीं, कुछ अन्य सवालों में भी शब्दों की अशुद्धियों के कारण अर्थ बदल गया, जिससे परीक्षार्थियों को जवाब देने में भ्रम की स्थिति बनी।
GS पेपर-2 में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
बताया जा रहा है कि सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-2 में सबसे अधिक त्रुटियां थीं। एक सवाल में “ठोकलो सोहोर शासन व्यवस्था” पूछा गया, जो स्पष्ट रूप से गलत अनुवाद है।
इसके अलावा नृत्य से जुड़े प्रश्नों और विश्वविद्यालयों के नामों में भी गलतियां पाई गईं। पेपर-1 में भी ‘बेटन वुड्स सम्मेलन’ को गलत तरीके से लिखा गया।
पहले भी हो चुकी है ऐसी गलती
यह पहली बार नहीं है जब JPSC की परीक्षा में इस तरह की त्रुटियां सामने आई हैं। इससे पहले सहायक वन संरक्षक परीक्षा में भी दर्जनों अनुवाद संबंधी गलतियां मिली थीं, जिस पर आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया था।
मॉडरेशन प्रक्रिया पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा में प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद मॉडरेशन और प्रूफरीडिंग अनिवार्य होती है। इसके बावजूद इतनी गलतियों का सामने आना आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इस स्तर की परीक्षा में ऐसी चूक अस्वीकार्य है और इससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
परीक्षार्थियों ने आयोग से मांग की है कि इन गलतियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर, JPSC की परीक्षा में बार-बार हो रही ऐसी चूकें आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं।



