मनरेगा पर JMM का केंद्र पर वार: ‘ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने की हो रही साजिश’
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मनरेगा पर JMM का केंद्र पर वार: 'ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने की हो रही साजिश'
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने मनरेगा योजना में प्रस्तावित बदलावों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र पर मनरेगा को जानबूझकर कमजोर करने और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
मंदी और कोरोना काल में मनरेगा ही थी संजीवनी: JMM
सुप्रियो भट्टाचार्य ने मनरेगा के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
मजबूत अर्थव्यवस्था: 2007-08 की वैश्विक मंदी में भारत की सुरक्षा का आधार ग्रामीण अर्थव्यवस्था थी, जिसे 2009 में यूपीए सरकार ने मनरेगा के जरिए कानूनी ताकत दी।
संकट का साथी: 2014 के बाद भले ही इस योजना का मजाक उड़ाया गया, लेकिन कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों के लिए यही योजना ‘संजीवनी’ साबित हुई।
केंद्र सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप
JMM नेता ने केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे बदलावों को “मनरेगा की आत्मा खत्म करने वाला” बताया:
अधिकारों में कटौती: 100 दिन के रोजगार की गारंटी को घटाकर 60 दिन करने की तैयारी हो रही है, जो मजदूरों के हक पर हमला है।
चयनात्मक रोजगार: गांवों को अधिसूचित करने का अधिकार केंद्र अपने पास रखकर वेलफेयर योजनाओं को वोट बैंक से जोड़ रहा है। इससे केवल चुनिंदा लोगों को ही काम मिलेगा।
तकनीकी बाधाएं: बायोमेट्रिक सिस्टम और ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट की वजह से मजदूरों को समय पर काम और भुगतान में भारी परेशानी हो रही है।
झारखंड के बकाया फंड पर घेरा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने तल्ख तेवर में कहा कि झारखंड को पिछले कई वर्षों से मनरेगा और खनन (Mining) की बकाया केंद्रीय राशि नहीं मिल रही है। उन्होंने इसे राज्य के हक को मारने और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।
JMM ने स्पष्ट किया कि वह इन बदलावों का पुरजोर विरोध करेगी और राज्य के मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रखेगी।