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झारखंड राज्यसभा चुनाव: विधायकों की पहरेदारी शुरू, परिमल नाथवानी की एंट्री से बढ़ा सियासी रोमांच

राज्यसभा चुनाव की अग्निपरीक्षा विधायकों पर कड़ी नजर परिमल नाथवानी से बढ़ी टेंशन


मानसून की फुहारों के बीच राज्यसभा चुनाव की अग्निपरीक्षा, झारखंड में शुरू हुई विधायकों की पहरेदारी

Ranchi: झारखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान भी चरम पर पहुंच गया है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और एनडीए दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है। संख्याबल के बावजूद क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक सेंधमारी की आशंकाओं ने सभी दलों को सतर्क कर दिया है। इसी के मद्देनजर विधायकों की निगरानी और रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

परिमल नाथवानी की एंट्री से बदला चुनावी समीकरण

भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के चुनावी मैदान में उतरने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। झामुमो और कांग्रेस गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद विपक्ष की सक्रियता ने चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग और अप्रत्याशित घटनाक्रम परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। यही वजह है कि गठबंधन और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हैं।

कांग्रेस और गठबंधन की रणनीति

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास में गठबंधन दलों की संयुक्त बैठक प्रस्तावित है।

सूत्रों के अनुसार, विधायकों को मतदान प्रक्रिया की बारीकियों से अवगत कराने के लिए मॉक पोल (प्रशिक्षण मतदान) भी कराया जा सकता है, ताकि मतदान के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि न हो और प्रत्येक वोट सही तरीके से दर्ज हो।

एनडीए ने भी की किलाबंदी

दूसरी ओर एनडीए ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति बनाई है। भाजपा और सहयोगी दलों के विधायक मतदान तक सामूहिक रूप से रहेंगे और निर्धारित कार्यक्रम के तहत सीधे मतदान के लिए विधानसभा पहुंचेंगे।

एनडीए का दावा है कि उसके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विधायकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

साख और रणनीति की परीक्षा

इस चुनाव में केवल दो राज्यसभा सीटों का फैसला नहीं होना है, बल्कि यह राजनीतिक दलों की एकजुटता और रणनीतिक क्षमता की भी परीक्षा माना जा रहा है। दोनों पक्ष अपने-अपने विधायकों को साधने और किसी भी संभावित राजनीतिक उलटफेर को रोकने में जुटे हैं।

अब सभी की निगाहें 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। परिणाम यह तय करेंगे कि झारखंड की इस राजनीतिक बिसात पर किसकी रणनीति सफल होती है और कौन राज्यसभा की दौड़ में बाजी मारता है।

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