Jharkhand News: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और जमुई विधायक श्रेयसी सिंह ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा।
“कांग्रेस को अपने राजनीतिक पाप की सजा मिलेगी”: Jharkhand News
सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मुद्दे पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने “राजनीतिक पाप” किया है, जिसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सोच हमेशा सीमित रही है और उनके लिए महिला नेतृत्व कुछ खास परिवारों तक ही सिमट कर रह गया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाए हैं चाहे वह ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाएं हों या राजनीति में 33% आरक्षण का प्रयास।
“विपक्ष ने महिलाओं का अपमान किया”: Jharkhand News
सोनोवाल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जो रवैया अपनाया गया, वह महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के विरोध और “कुतर्क” से यह साफ हो गया है कि वे महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त नहीं देखना चाहते। उन्होंने झारखंड सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं और सरकार उन्हें रोकने में विफल रही है।
“आधी आबादी को सिर्फ नारों तक सीमित रखना चाहता है विपक्ष”: Jharkhand News
वहीं, श्रेयसी सिंह ने विपक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो दल महिलाओं के नाम पर राजनीति करते हैं, वही उन्हें वास्तविक अधिकार देने के समय पीछे हट जाते हैं। श्रेयसी सिंह के मुताबिक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि देश की हर महिला का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस बिल के जरिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ सकती थी, लेकिन विपक्ष ने वोटिंग से दूरी बनाकर अपनी “महिला विरोधी मानसिकता” उजागर कर दी।
“सिर्फ बिल नहीं, विपक्ष की साख भी गिरी”
उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक का मामला नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं की नजरों में विपक्ष की साख भी गिरी है। श्रेयसी सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आगे आएं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। एक ओर बीजेपी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और मंशा पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।



