
झारखंड के पहले कैनाल-टॉप सोलर प्रोजेक्ट को हरी झंडी, ₹3.37 प्रति यूनिट तय हुई बिजली दर
रांची: झारखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने रांची जिले के सिकिदिरी नहर पर स्थापित 2 मेगावाट क्षमता वाले कैनाल-टॉप सोलर पावर प्लांट की पूंजीगत लागत और बिजली खरीद दर को मंजूरी दे दी है। आयोग ने बिजली का लेवलाइज्ड टैरिफ 4.04 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 3.37 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया है।
इस फैसले से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को इस परियोजना से उत्पादित बिजली खरीदने का रास्ता साफ हुआ है। इसके अलावा झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को प्रशासनिक और समन्वय कार्यों के लिए 2 पैसे प्रति यूनिट की दर से फैसिलिटेशन चार्ज लेने की अनुमति भी दी गई है।
क्या है सिकिदिरी का कैनाल-टॉप सोलर प्रोजेक्ट?
सिकिदिरी नहर पर स्थापित यह 2 मेगावाट क्षमता वाला ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट अपनी तरह की विशेष परियोजना है। इसमें नहर के ऊपर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे एक ही स्थान का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और जल संसाधन प्रबंधन दोनों के लिए किया जा सकता है।
इस परियोजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ नहर के पानी के वाष्पीकरण को कम करना और उपलब्ध जलमार्ग की सतह का बेहतर इस्तेमाल करना है।
झारखंड ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) ने परियोजना के विकास, डिजाइन, इंजीनियरिंग, उपकरणों की आपूर्ति, निर्माण और कमीशनिंग के साथ शुरुआती 10 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव का जिम्मा मेसर्स नविया टेक्नोलॉजीज रिन्यूवल प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था। एजेंसी का चयन न्यूनतम बोली के आधार पर किया गया था।
इसके बाद सिकिदिरी सब-स्टेशन के माध्यम से उत्पादित बिजली की आपूर्ति के लिए JREDA और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के बीच बिजली खरीद समझौते (PPA) से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की गई।
₹4.04 से घटकर ₹3.37 प्रति यूनिट हुई बिजली दर
इस परियोजना की बिजली खरीद दर को लेकर नियामक आयोग में सुनवाई हुई थी। इस दौरान बिजली वितरण निगम ने JREDA की ओर से प्रस्तावित 4.04 रुपये प्रति यूनिट के लेवलाइज्ड टैरिफ पर आपत्ति जताई थी।
JBVNL का तर्क था कि परियोजना का 100 प्रतिशत वित्तपोषण झारखंड सरकार के पूंजीगत अनुदान से किया गया है। ऐसे में ऋण, इक्विटी, ब्याज और अनुदान से प्राप्त परिसंपत्तियों पर मूल्यह्रास जैसे खर्चों को टैरिफ में शामिल करना उचित नहीं होगा।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और परियोजना के वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की। इसके बाद स्पष्ट किया कि चूंकि परियोजना पूरी तरह सरकारी पूंजीगत अनुदान से वित्तपोषित है, इसलिए ऋण-इक्विटी अनुपात, ऋण पर ब्याज, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और रिटर्न ऑन इक्विटी जैसे वित्तीय घटकों को शून्य माना जाएगा।
इसी आधार पर आयोग ने 25 वर्षों के परियोजना जीवनकाल के लिए लेवलाइज्ड टैरिफ 3.37 रुपये प्रति यूनिट तय किया।
सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ जल संरक्षण पर भी जोर
सिकिदिरी की यह परियोजना झारखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपलब्ध वैकल्पिक स्थानों के इस्तेमाल का उदाहरण है। नहर के ऊपर सोलर पैनल लगाने से जमीन की अलग से जरूरत कम होती है। साथ ही, पैनलों की छाया से पानी के वाष्पीकरण में कमी आने की संभावना रहती है।
नियामक आयोग के टैरिफ संबंधी फैसले से परियोजना की बिजली खरीद की दर तय हो गई है। अब इस परियोजना से बिजली आपूर्ति और उसके संचालन से जुड़े पहलुओं पर नजर रहेगी।
झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए सिकिदिरी का कैनाल-टॉप सोलर प्रोजेक्ट भविष्य में ऐसी अन्य परियोजनाओं के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।



