Jharkhand VidhanSabha के शीतकालीन सत्र का आज अंतिम दिन था लेकिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही माहौल गर्म हो गया। सदन के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी विधायकों ने सरकार पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को भूल जाने का आरोप लगाते हुए तंज कसना शुरू किया। इसी दौरान कई विधायकों ने एक सुर में नारा लगाया- “वादा… तेरा वादा… कहां गया वादा!” यह नारा विधानसभा परिसर में गूंजता रहा और माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण बना रहा।

विपक्ष का आरोप: “सरकार ने रोजगार, शिक्षा और किसानों से जुड़े वादे पूरे नहीं किए”
विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य सरकार ने 2024 के चुनावों से पहले कई बड़े वादे किए थे लेकिन जमीन पर उनका कोई असर नहीं दिख रहा। विपक्ष ने दावा किया कि बेरोजगारी में कमी, सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया में तेजी, किसानों को समय पर मुआवजा और आदिवासी-मूलवासी क्षेत्रों में विकास के वादे सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहे।
विपक्षी नेताओं का कहना था कि सत्र के दौरान इन मुद्दों पर चर्चा की बजाय सरकार ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। इसी के विरोध में “वादा… तेरा वादा…” जैसे नारे लगाए गए जिससे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति साफ दिखी।
सत्ता पक्ष का पलटवार: “विकास कार्यों को जानबूझकर नकार रहा विपक्ष”
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम किया है
- ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण,
- बिजली आपूर्ति,
- किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि,
- जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन कनेक्शन,
- तथा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार
इन सबको विपक्ष नजरअंदाज कर रहा है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि विपक्ष सत्र को बाधित कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
सदन के भीतर भी जारी रही तीखी जुबानी जंग, कार्यवाही कई बार बाधित
सदन के भीतर प्रवेश करने के बाद भी यह विवाद शांत नहीं हुआ। विपक्ष ने नारेबाजी जारी रखी और सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप दोहराया। कई बार कार्यवाही को रोकना पड़ा।
विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से शांत रहने और कार्यवाही सुचारू रूप से चलने की अपील की लेकिन सदन में शोरगुल लगातार बना रहा।
जनता के मुद्दों पर कब होगी ठोस चर्चा? सवालों के घेरे में पूरा सत्र
सत्र के अंतिम दिन का यह टकराव राज्य की राजनीति में कई सवाल छोड़ गया है। क्या जनता के वास्तविक मुद्दे अब भी केंद्र में हैं? क्या विधानसभा सत्र केवल आरोप-प्रत्यारोप का मंच बनकर रह गया है?
लोग उम्मीद कर रहे थे कि अंतिम दिन सरकार और विपक्ष मिलकर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और आदिवासी क्षेत्रों के विकास जैसे सवालों पर ठोस चर्चा करेंगे। लेकिन नारेबाजी और टकराव में पूरा माहौल राजनीतिक रंग में घिर गया।



