Iran Crisis: मेजबान बनने की होड़ में पाकिस्तान, भारत में ‘मध्यस्थता’ को लेकर छिड़ा सियासी घमासान

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध को रोकने के लिए अब कूटनीतिक ‘चौधरी’ बनने की होड़ मच गई है। इस रेस में पाकिस्तान ने खुद को आगे करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच मेजबानी (Hosting) का प्रस्ताव रखा है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बयान के बाद भारत में भी सियासत गरमा गई है और विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।
Iran Crisis: पाकिस्तान की ‘जबरन’ मध्यस्थता की कोशिश?
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की है।
-
मेजबानी का प्रस्ताव: शरीफ ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो पाकिस्तान दोनों देशों के बीच ‘निर्णायक वार्ता’ की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
-
राष्ट्रपति से बातचीत: इससे पहले शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात कर तनाव कम करने के लिए ‘सामूहिक प्रयासों’ पर जोर दिया था।
-
कूटनीतिक दांव: जानकारों का मानना है कि आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान इस संकट के बहाने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रासंगिकता (Relevance) साबित करना चाहता है।
Iran Crisis: ट्रंप का ‘5 दिन’ वाला अल्टीमेटम और ईरान का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच एक बड़ा बयान दिया है:
-
समयसीमा बढ़ी: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की समयसीमा बढ़ा दी है और ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले को 5 दिनों के लिए टाल दिया है।
-
बातचीत का दावा: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दूत एक ‘सम्मानित ईरानी नेता’ के साथ बातचीत कर रहे हैं और ईरान समझौता चाहता है।
-
ईरान का इनकार: वहीं, ईरान ने किसी भी गुप्त समझौते की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि उनकी ‘कड़ी चेतावनी’ के बाद ट्रंप को पीछे हटना पड़ा है।
भारत में विपक्ष हमलावर: “हम पिछड़ क्यों गए?”
पाकिस्तान के मध्यस्थ के रूप में उभरने की खबरों ने भारत में राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा है।
“युद्ध से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने इजरायल की यात्रा की, जिससे भारत की तटस्थ छवि प्रभावित हुई। आज भारत को मध्यस्थ की भूमिका में होना चाहिए था, लेकिन खबरों में पाकिस्तान का नाम आ रहा है। यह हमारी कूटनीतिक उपेक्षा है।”
— जयराम रमेश, महासचिव, कांग्रेस
जहाँ पाकिस्तान इस संकट में खुद को ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश कर रहा है, वहीं भारत सरकार का रुख अब भी ‘संवाद और कूटनीति’ पर टिका है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान वास्तव में पाकिस्तान की जमीन पर अमेरिका से बात करने को राजी होता है या यह केवल इस्लामाबाद की एक तरफा कोशिश बनकर रह जाएगी।
यह भी पढ़े: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का हित सुरक्षित: Pradeep Verma



