
झारखंड के ₹8,399 करोड़ के प्रथम अनुपूरक बजट को राज्यपाल की मंजूरी, अब खर्च की खुली राह
Ranchi: झारखंड के वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम अनुपूरक बजट को अब खर्च करने की अनुमति मिल गई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को बजट प्रावधानों के तहत राशि खर्च करने की अनुमति दे दी है। प्रथम अनुपूरक बजट का कुल आकार 8,399 करोड़ रुपये बताया गया है।
राज्यपाल ने झारखंड विनियोग (संख्या-03) विधेयक, 2026 को 13 अगस्त को मंजूरी दी थी। इसके बाद विधि विभाग ने 14 अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी की। अब राज्य की संचित निधि से स्वीकृत बजट प्रावधानों के अनुसार राशि खर्च की जा सकेगी।
वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने इस संबंध में राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र जारी किया है।
ग्रामीण विकास को सबसे ज्यादा 4,258 करोड़ रुपये
प्रथम अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास विभाग को सबसे अधिक 4,258.67 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके बाद ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 885.83 करोड़ रुपये और प्राथमिक शिक्षा विभाग के लिए 946.30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वहीं आपदा प्रबंधन विभाग को 490.68 करोड़ रुपये, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 271.61 करोड़ रुपये और पंचायती राज विभाग को 244.80 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग को 218 करोड़ से अधिक
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 218.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका इस्तेमाल राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
गृह एवं कारा विभाग के लिए 144.16 करोड़ रुपये और खान विभाग के लिए 173.65 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए भी प्रावधान
प्राथमिक शिक्षा विभाग को 946.30 करोड़ रुपये का प्रावधान मिला है। वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 25.05 करोड़ रुपये और स्कूली शिक्षा विभाग के लिए 0.15 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 14.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सड़कों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर जोर
ग्रामीण कार्य विभाग को 885.83 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं पथ निर्माण विभाग के लिए 0.04 करोड़ रुपये और नगर विकास विभाग के लिए 20.20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जल संसाधन विभाग को सिंचाई और जल प्रबंधन योजनाओं के लिए 18.06 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
पेयजल के लिए 271 करोड़ से ज्यादा
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के लिए 271.61 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि का इस्तेमाल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति तथा स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं में किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन के लिए 490 करोड़
राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और राहत कार्यों के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को 490.68 करोड़ रुपये का प्रावधान मिला है।
इसके अलावा ऊर्जा विभाग को 1.43 करोड़ रुपये, वन विभाग को 23.55 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग को 36.76 करोड़ रुपये और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को 66.52 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
अन्य प्रमुख विभागों को कितना मिला?
अनुपूरक बजट में कई अन्य विभागों के लिए भी राशि का प्रावधान किया गया है।
- मंत्रिमंडल सचिवालय: ₹21.75 करोड़
- मंत्रिमंडल निर्वाचन: ₹86.77 करोड़
- वित्त विभाग: ₹5.69 करोड़
- वाणिज्य कर विभाग: ₹8.85 करोड़
- कर्मचारी एवं प्रशासनिक विभाग: ₹33.20 करोड़
- विधि विभाग: ₹29.54 करोड़
- हाईकोर्ट: ₹19.20 करोड़
- भू-राजस्व विभाग: ₹16.29 करोड़
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग: ₹16.95 करोड़
- एसटी-एससी एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण: ₹91.24 करोड़
- पर्यटन विभाग: ₹36.76 करोड़
- डेयरी विभाग: ₹7.06 करोड़
- कला, संस्कृति एवं खेल: ₹0.50 करोड़
कर्ज के ब्याज और अदायगी के लिए भी राशि
सरकार द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज भुगतान के लिए 152 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं पूर्व के कर्ज और ऋणों की अदायगी के लिए 31.08 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
अब विभाग कर सकेंगे स्वीकृत राशि खर्च
राज्यपाल की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद अब संबंधित विभाग प्रथम अनुपूरक बजट में किए गए प्रावधानों के अनुसार राशि खर्च कर सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों को नियमानुसार बजट राशि के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं।
इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, प्राथमिक शिक्षा, ग्रामीण कार्य, आपदा प्रबंधन, पेयजल, स्वास्थ्य और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में चल रही योजनाओं और विकास कार्यों को वित्तीय गति मिलने की उम्मीद है।



