दिल्ली में जुटे कांग्रेस के दिग्गज, मताधिकार की रक्षा का ऐलान

SIR पर झारखंड कांग्रेस का विरोध तेज, मंत्री-विधायक दिल्ली पहुंचे; मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की मांग

SIR पर झारखंड कांग्रेस का विरोध तेज, दिल्ली में जुटे मंत्री-विधायक; मताधिकार की रक्षा का ऐलान

Ranchi/New Delhi: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झारखंड कांग्रेस ने अपना विरोध तेज कर दिया है। पार्टी के मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचे हैं। नई दिल्ली स्थित न्यू झारखंड भवन में जुटे कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।

केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में पहुंचे नेता

झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचे नेताओं में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, कांके विधायक सुरेश बैठा, जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू और रामगढ़ विधायक ममता देवी शामिल हैं।

इसके अलावा महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो, पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत कई वरिष्ठ नेता भी आंदोलन में शामिल होने पहुंचे हैं। पार्टी की ओर से विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने की भी जानकारी दी गई है।

SIR से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका: कांग्रेस

कांग्रेस का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर निर्वाचन प्रक्रिया के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। पार्टी ने अपनी मांगों के समर्थन में कहा है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत पर जोर

कांग्रेस नेताओं ने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र का बुनियादी हिस्सा बताते हुए ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत की रक्षा करने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।

SIR को लेकर कांग्रेस का यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और पात्र मतदाताओं के नामों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की आपत्तियां आगे भी चर्चा में रह सकती हैं।

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