
पटना | Bihar के सियासी गलियारों में एक बड़ी हलचल मची हुई है। चर्चा है कि बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर दिल्ली का रुख कर सकते हैं और आगामी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बन सकते हैं।
सबसे चौंकाने वाली खबर उनके बेटे निशांत कुमार को लेकर आ रही है। जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के बयानों और पार्टी कार्यालयों में लगे पोस्टरों से यह संकेत मिल रहे हैं कि निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री फाइनल हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें राज्य सरकार में उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
निशांत कुमार: जेडीयू के नए ‘सियासी वारिस’?
नीतीश कुमार हमेशा से परिवारवाद की राजनीति के कट्टर विरोधी रहे हैं, लेकिन अब पार्टी के भीतर से ही निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग तेज हो गई है।
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नेताओं का समर्थन: जेडीयू मंत्री श्रवण कुमार और अशोक चौधरी ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राज्य का युवा और पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत कुमार कमान संभालें।
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राज्यसभा का विकल्प: कुछ सूत्रों का यह भी मानना है कि निशांत कुमार को सीधे राज्यसभा भी भेजा जा सकता है, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का चेहरा बन सकें।
Bihar News: क्यों हो रहा है यह बदलाव?
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नीतीश कुमार का स्वास्थ्य: हाल ही में 75 वर्ष के हुए नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि वे अब दिल्ली में रहकर एनडीए गठबंधन और राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
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उत्तराधिकार की योजना: जेडीयू के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर जारी अनिश्चितता को खत्म करने के लिए निशांत कुमार को आगे लाना एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
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एनडीए का समीकरण: भाजपा के साथ रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने के लिए भी यह नेतृत्व परिवर्तन महत्वपूर्ण हो सकता है।
Bihar News: राज्यसभा चुनाव और ‘खेला’ की आशंका
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है।
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भाजपा की तैयारी: भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।
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आरजेडी की चुनौती: तेजस्वी यादव ने भी अपनी पार्टी से उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है, जिससे पांचवीं सीट के लिए क्रॉस-वोटिंग और कड़े मुकाबले की संभावना बढ़ गई है।
अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो यह बिहार के इतिहास का एक बड़ा मोड़ होगा। निशांत कुमार का उदय जेडीयू के लिए ‘नया सवेरा’ होगा या ‘dynasty politics’ के आरोपों का नया दौर, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, 5 मार्च (नामांकन की आखिरी तिथि) तक स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।



