Bihar MLC Election 2026: राज्यसभा चुनाव के बाद अब बिहार की राजनीति का फोकस विधान परिषद चुनाव पर आ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने गणित बैठाने में जुटे हैं। मौजूदा संकेतों के अनुसार, इस चुनाव में एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि महागठबंधन को नुकसान झेलना पड़ सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या नए चेहरे राजनीति में एंट्री करेंगे और क्या विपक्ष अपनी पकड़ बचा पाएगा।
12 सीटों पर चुनाव, समीकरण दिलचस्प: Bihar MLC Election 2026
बिहार विधान परिषद की कुल 12 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें से 9 सीटों का कार्यकाल जून 2026 में खत्म हो रहा है, जबकि 3 सीटों पर उपचुनाव होना है। खाली होने वाली सीटों में राजद, जदयू, बीजेपी और कांग्रेस सभी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ सीटें पहले ही खाली हो चुकी हैं, क्योंकि उनके सदस्य विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं।
जीत का गणित क्या कहता है?: Bihar MLC Election 2026
विधानसभा कोटे से होने वाले चुनाव में जीत के लिए 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा।
243 सदस्यीय विधानसभा के हिसाब से यह आंकड़ा तय होता है। ऐसे में जिन पार्टियों के पास पर्याप्त संख्या है, उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
महागठबंधन के पास कुल मिलाकर करीब 41 विधायक हैं, जिससे वे मुश्किल से एक ही उम्मीदवार को जिता सकते हैं। दूसरे उम्मीदवार के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है।
NDA को फायदा, महागठबंधन को नुकसान: Bihar MLC Election 2026
मौजूदा गणित के अनुसार, एनडीए को इस चुनाव में कम से कम 2 सीटों का फायदा हो सकता है। जहां महागठबंधन अपनी 3 में से सिर्फ 1 सीट बचा पाने की स्थिति में दिख रहा है, वहीं एनडीए की झोली में ज्यादा सीटें जाती नजर आ रही हैं। जदयू और बीजेपी दोनों के पास पर्याप्त विधायक हैं, जिससे उनके कई उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
निशांत और दीपक की एंट्री तय?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar की खाली सीट पर उनके बेटे निशांत कुमार को विधान परिषद भेजा जा सकता है। वहीं, बीजेपी कोटे से Mangal Pandey की सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मौका मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में युवा चेहरों की एंट्री का संकेत होगा।
क्या चिराग पासवान का खुलेगा खाता?
Chirag Paswan की पार्टी एलजेपी (रामविलास) भी इस बार विधान परिषद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है। पार्टी के पास 19 विधायक हैं और उसे जीत के लिए 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में बीजेपी का समर्थन मिलने पर एलजेपी (आर) का खाता खुल सकता है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नए चेहरों पर दांव
इस चुनाव में कई पार्टियां नए चेहरों को मौका दे सकती हैं। बीजेपी और जदयू दोनों ही कुछ पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को आगे ला सकती हैं। वहीं, राजद में भी कुछ सीटों पर बदलाव के संकेत हैं, हालांकि कुछ पुराने नेताओं की वापसी भी तय मानी जा रही है।
बड़ा सवाल: क्या फिर होगा जोड़-तोड़?
राज्यसभा चुनाव की तरह क्या इस बार भी जोड़-तोड़ की राजनीति देखने को मिलेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि संख्या बल के हिसाब से कई सीटों पर सीधी टक्कर नहीं बल्कि रणनीतिक खेल देखने को मिल सकता है। बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 सिर्फ सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का भी मंच बनने जा रहा है।
एक तरफ एनडीए अपनी बढ़त मजबूत करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ महागठबंधन अपनी जमीन बचाने की चुनौती से जूझ रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि Tejashwi Yadav और चिराग पासवान इस चुनाव में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं।


