
झारखंड ट्रेजरी घोटाला: 7 जिलों में 150 करोड़ की फर्जी निकासी, सरकार सख्त; बड़े स्तर पर तबादले तय
रांची: झारखंड में ट्रेजरी से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि सात जिलों में वेतन के नाम पर 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्जी निकासी की गई है।
सात जिलों में फैला घोटाला
जांच के दायरे में Bokaro, Hazaribagh, Palamu, Jamshedpur, Deoghar, Ramgarh और Ranchi शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह गड़बड़ी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा हो सकती है।
निगरानी करने वाले ही शक के घेरे में
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पदों पर वित्तीय निगरानी की जिम्मेदारी थी—जैसे डीडीओ, ट्रेजरी अफसर, ऑडिट अधिकारी और लेखा कर्मी—उन्हीं पर अब शक की सुई घूम रही है। स्टेट ऑडिट से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
सरकार का कड़ा एक्शन
वित्त सचिव Prashant Kumar ने तुरंत सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि तीन साल से एक ही जगह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल तबादला किया जाए। साथ ही उन्हें उन स्थानों पर पोस्टिंग नहीं दी जाएगी, जहां वे पहले काम कर चुके हैं।
सरकार का मानना है कि इससे पुराने “सिंडिकेट” की कड़ियां टूटेंगी और घोटाले की जड़ तक पहुंचना आसान होगा।
जिलावार फर्जी निकासी का अनुमान
- हजारीबाग: 50–70 करोड़
- बोकारो: 30–50 करोड़
- रांची: 10–20 करोड़
- जमशेदपुर: 5–10 करोड़
- देवघर: 3–5 करोड़
- रामगढ़: 3–4 करोड़
- पलामू: 3–4 करोड़
(अंतिम आंकड़ा ऑडिट और जांच के बाद तय होगा)
CID जांच और हाई-लेवल कमेटी
सरकार ने हजारीबाग और बोकारो से जुड़े मामलों को जल्द Criminal Investigation Department को सौंपने का फैसला लिया है। साथ ही विस्तृत जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई है, जो पूरे मामले की तह तक जाएगी।
सिस्टम में बदलाव शुरू
घोटाला सामने आने के बाद रांची में ट्रेजरी सिस्टम में बदलाव शुरू कर दिया गया है। अब डीडीओ के प्रमाणपत्र के बिना वेतन भुगतान नहीं होगा। कर्मचारियों और उनके बैंक खातों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
आगे क्या?
- बड़े पैमाने पर तबादले की सूची जल्द जारी हो सकती है
- दोषियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई संभव
- अवैध निकासी की रकम की रिकवरी के लिए संपत्ति जब्ती तक हो सकती है
- भविष्य में ऐसे घोटाले रोकने के लिए सॉफ्टवेयर और निगरानी सिस्टम में बदलाव
कुल मिलाकर, यह घोटाला झारखंड की वित्तीय व्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। अब नजर इस पर है कि जांच कितनी तेजी और निष्पक्षता से आगे बढ़ती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है



