
“झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का अनमोल धरोहर: गुमला में मिला प्राचीन स्तंभ”
गुमला | रिपोर्ट
झारखंड की धरती सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों से ही नहीं, बल्कि अपने समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जानी जाती है। हाल ही में गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित प्राचीन डोइसानगर (नवरतनगढ़) क्षेत्र में मिले एक प्राचीन स्तंभ ने एक बार फिर इस विरासत को सामने ला दिया है।
नागवंश काल की ऐतिहासिक पहचान
पुराविद डाॅ नीरज कुमार मिश्र के अनुसार, झारखंड का यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है। उन्होंने बताया कि नागवंश के शासकों द्वारा निर्मित इस स्तंभ का विशेष महत्व है, क्योंकि झारखंड में इस तरह के स्तंभ लेख के प्रमाण बहुत कम देखने को मिलते हैं।
नवरतनगढ़ क्षेत्र में पहले से ही कई प्राचीन मंदिर, राजमहल, किलेबंदी और सैन्य संरचनाओं के अवशेष मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक अहमियत को दर्शाते हैं।
स्तंभ की खासियत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तंभ लगभग 20 फीट ऊंचा है और स्थानीय ग्रेनाइट पत्थर को तराशकर बनाया गया है। इसके ऊपरी हिस्से पर खिले हुए कमल का सुंदर अंकन किया गया है, जबकि अन्य हिस्सों में अभिलेख भी मौजूद हैं। यह शिल्पकला प्राचीन भारतीय स्थापत्य परंपरा की झलक देती है।
संरक्षण की जरूरत
डाॅ नीरज कुमार मिश्र ने कहा कि इस स्तंभ को हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए। इसके चारों ओर मिट्टी भरकर और सीमेंट-ईंट से घेराबंदी कर इसे सुरक्षित किया जा सकता है, ताकि यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
प्रशासन भी हुआ सतर्क
वहीं, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी आशीष प्रताप ने बताया कि तालाब के गहरीकरण के दौरान इस स्तंभ की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि अब इसे संरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
गुमला में मिला यह प्राचीन स्तंभ झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। जरूरत है कि ऐसे ऐतिहासिक धरोहरों को समय रहते संरक्षित किया जाए, ताकि राज्य की पहचान और इतिहास सुरक्षित रह सके।



