
खनिज विधेयक 2026 पर झारखंड में सियासी टकराव तेज, 16-17 अगस्त को राज्यभर में प्रतिवाद करेगी माले
Ranchi: केंद्र सरकार के खनिज एवं खनन विकास विनियमन संशोधन विधेयक-2026 को लेकर झारखंड में सियासी टकराव तेज हो गया है। भाकपा माले ने इस विधेयक को झारखंड के आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके विरोध में 16 और 17 अगस्त को राज्यभर में प्रतिवाद दिवस मनाने का ऐलान किया है।
माले नेताओं का कहना है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व की बड़ी भूमिका है। इसी आय के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को गति मिलती है। पार्टी का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन से खनन क्षेत्र से मिलने वाले सेस पर राज्य का अधिकार कमजोर हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
भाकपा माले ने अपने विरोध के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का हवाला दिया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के खनिज वाली जमीन पर कर लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी।
माले का आरोप है कि केंद्र सरकार का प्रस्तावित संशोधन इसी संवैधानिक अधिकार को सीमित करने की दिशा में कदम है। पार्टी ने कहा कि खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए विधेयक का विरोध जरूरी है।
16-17 अगस्त को राज्यभर में होंगे विरोध कार्यक्रम
माले के मुताबिक, 16 और 17 अगस्त को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा।
माले नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों और मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आगे चलकर खनिजों की ढुलाई रोकने का अभियान भी चलाया जा सकता है।
पार्टी की ओर से कहा गया कि झारखंड से निकलने वाले कोयला, लौह अयस्क, यूरेनियम, तांबा और सोना जैसे खनिजों से जुड़े राजस्व और अधिकारों पर केंद्र को राज्य के हितों को ध्यान में रखना चाहिए।
भाजपा के झारखंड से जुड़े जनप्रतिनिधियों से मांगा जवाब
भाकपा माले ने भाजपा और झारखंड से जुड़े उसके जनप्रतिनिधियों को भी निशाने पर लिया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि खनिज विधेयक को लेकर भाजपा के सांसदों और नेताओं को झारखंड की जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
माले का कहना है कि झारखंड की खनिज संपदा का इस्तेमाल देश के औद्योगिक विकास में लंबे समय से होता रहा है, लेकिन खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को विस्थापन, रोजगार और पर्यावरण से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर भी माले का भाजपा पर हमला
भाकपा माले ने JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि छात्र संगठन आइसा पहले से ही अभ्यर्थियों के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और छात्रों की मांगों के समर्थन में खड़ा है।
माले नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा अब छात्र आंदोलन को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर निष्पक्ष जांच और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री से छात्रों से सीधे संवाद की अपील
माले ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे बातचीत करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन का समाधान बातचीत और ठोस निर्णय के जरिए निकाला जाना चाहिए।
माले नेताओं ने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और उनके साथ संवाद कायम कर गतिरोध खत्म करने की मांग की है।
बहरहाल, खनिज विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध अब सड़क तक पहुंचने की तैयारी में है। 16 और 17 अगस्त को प्रस्तावित माले के प्रतिवाद कार्यक्रम के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर टकराव और तेज होने के आसार हैं।



