
2.20 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा समेत 3 शीर्ष माओवादी 14 दिन की पुलिस रिमांड पर, कई राज्यों की एजेंसियां करेंगी पूछताछ
NIA, CRPF समेत बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की पुलिस कर सकती है पूछताछ; हथियार, वित्तीय स्रोत और माओवादी नेटवर्क के राज खंगालने की तैयारी
Ranchi/Dhanbad: धनबाद से गिरफ्तार प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर और उसके दो अन्य हार्डकोर साथियों मोछू मुर्मू उर्फ मेहनत तथा गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धनबाद की अदालत ने तीनों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दे दी है। अब सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय स्रोतों और सक्रिय दस्तों को लेकर इनसे गहन पूछताछ की तैयारी कर रही हैं।
गुरुवार को धनबाद पुलिस की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने तीनों माओवादियों की 14 दिनों की रिमांड मंजूर की। पुलिस शुक्रवार से तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू करने की तैयारी में है।
28 जुलाई को संयुक्त ऑपरेशन में हुई थी गिरफ्तारी
28 जुलाई की देर शाम CRPF की CoBRA बटालियन, धनबाद पुलिस और गिरिडीह पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीनों शीर्ष माओवादियों को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था।
जानकारी के अनुसार, तीनों एक टाटा मैजिक वाहन से जा रहे थे। सुरक्षा बलों को उनकी गतिविधि की सूचना मिलने के बाद घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से तीन AK-47 राइफल भी बरामद की गई थीं। सुरक्षा एजेंसियां इस कार्रवाई को झारखंड में माओवादी संगठन के खिलाफ हाल के समय की बड़ी सफलताओं में से एक मान रही हैं।
कई राज्यों की एजेंसियां कर सकती हैं पूछताछ
14 दिनों की रिमांड के दौरान केवल झारखंड पुलिस ही नहीं, बल्कि केंद्रीय सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के साथ पड़ोसी राज्यों की पुलिस भी तीनों से पूछताछ कर सकती है।
संबंधित एजेंसियों और विभागों को इसकी सूचना भेजी गई है। इनमें NIA, CRPF के अलावा बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की पुलिस शामिल हो सकती है।
मिसिर बेसरा लंबे समय से झारखंड के साथ-साथ दूसरे राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। ऐसे में पूछताछ के दौरान विभिन्न राज्यों में माओवादी गतिविधियों और संगठन के अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाएगी।
शहरी नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश
जांच एजेंसियों की पूछताछ का एक प्रमुख बिंदु माओवादियों का कथित शहरी और सहयोगी नेटवर्क हो सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि जंगलों से बाहर संगठन को किन लोगों से मदद मिलती थी और संपर्क तथा संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाती थी।
साथ ही वर्तमान में सक्रिय माओवादी दस्तों, उनके ठिकानों और संगठन की आगे की रणनीति से जुड़ी जानकारी भी जुटाने की कोशिश की जाएगी।
AK-47 कहां से आई? हथियारों के नेटवर्क की होगी जांच
गिरफ्तारी के दौरान बरामद तीन AK-47 राइफलों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई सवाल हैं। पूछताछ के दौरान हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति के स्रोत तथा नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
एजेंसियां यह भी जानने का प्रयास करेंगी कि संगठन तक आधुनिक हथियार किस रास्ते और किन माध्यमों से पहुंचते थे।
लेवी और वित्तीय नेटवर्क पर भी नजर
माओवादी संगठन के वित्तीय नेटवर्क को लेकर भी तीनों से सवाल किए जाने की संभावना है। लेवी वसूली, धन के स्रोत, रकम के इस्तेमाल और संगठन तक पैसा पहुंचाने वाले नेटवर्क से संबंधित जानकारियां जांच का अहम हिस्सा होंगी।
इनामी राशि के वितरण की प्रक्रिया
मिसिर बेसरा और मोछू मुर्मू पर घोषित इनामी राशि को लेकर भी आगे नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अभियान में CRPF की CoBRA बटालियन और जिला पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
तीनों शीर्ष माओवादियों से होने वाली पूछताछ पर अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारियां झारखंड और आसपास के राज्यों में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ आगे के अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।



