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10% पेंशन कटौती के बावजूद अंतिम पेंशन रोकना गलत, हाईकोर्ट ने PPO जारी करने का दिया आदेश

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 10% पेंशन कटौती के बाद अंतिम पेंशन नहीं रोकी जा सकती, 12 सप्ताह में PPO जारी करने का आदेश

10% पेंशन कटौती की सजा के बावजूद अंतिम पेंशन रोकना गलत, हाईकोर्ट ने 12 सप्ताह में PPO जारी करने का दिया आदेश

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी हो चुकी है और पेंशन में कटौती की अंतिम सजा दी जा चुकी है, तो केवल लंबित आपराधिक मामले के आधार पर उसकी अंतिम पेंशन (Final Pension) रोकी नहीं जा सकती।

न्यायमूर्ति दीपक रौशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार और महालेखाकार (AG) को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की सेवा पुस्तिका एवं पेंशन संबंधी अभिलेख भेजकर 90 प्रतिशत पेंशन का अंतिम भुगतान आदेश (PPO) जारी किया जाए। साथ ही 1 जनवरी 2027 से 100 प्रतिशत पेंशन निर्धारित कर 12 सप्ताह के भीतर PPO जारी करने का आदेश दिया।

क्या है मामला?

यह मामला श्याम देव प्रसाद सिंह की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए थे। विभागीय कार्रवाई के बाद उन्हें 10 वर्षों के लिए 10 प्रतिशत पेंशन कटौती की सजा दी गई थी।

हालांकि, इसके बावजूद राज्य सरकार ने अंतिम पेंशन निर्धारण के लिए आवश्यक दस्तावेज महालेखाकार को नहीं भेजे, जिसके कारण उन्हें केवल प्रोविजनल (अस्थायी) पेंशन ही मिल रही थी।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि नियम 43(बी) के तहत अंतिम दंडादेश पारित होने के बाद अंतिम पेंशन निर्धारण रोकने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बचता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभागीय कार्रवाई उसी आरोप के आधार पर पूरी हो चुकी है, तो लंबित आपराधिक मामला अंतिम पेंशन जारी करने में बाधा नहीं बन सकता।

चिकित्सा भत्ता पर भी निर्देश

चिकित्सा भत्ता (Medical Allowance) के संबंध में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को नया प्रतिवेदन देने की अनुमति दी। अदालत ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर नियमों के अनुसार निर्णय ले।

कोर्ट ने कहा कि यदि चिकित्सा भत्ता नियमों के तहत देय है, तो उसे भी केवल लंबित आपराधिक मामले के आधार पर रोका नहीं जा सकता।

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