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झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, रिटायर्ड चीफ जस्टिस और जजों के भत्तों में भारी बढ़ोतरी

झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों को अब मिलेगा ज्यादा भत्ता, सरकार ने जारी किया आदेश

झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: रिटायर्ड चीफ जस्टिस और जस्टिस के भत्तों में भारी बढ़ोतरी, 1 जून से लागू

रांची: Jharkhand High Court के सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस और जस्टिस को लेकर झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने नए संकल्प के तहत रिटायर्ड न्यायाधीशों को मिलने वाले घरेलू अनुसेवक, चालक, सुरक्षा और अनुसचिवीय सहायता भत्तों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

सरकार का यह आदेश 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है। खास बात यह है कि इन सुविधाओं का लाभ न्यायाधीश की मृत्यु के बाद उनके जीवित पति या पत्नी को भी मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया निर्णय

सरकार के अनुसार यह फैसला Supreme Court of India के 18 फरवरी 2025 के आदेश के आलोक में लिया गया है।

यह आदेश “जस्टिस वी.एस. दवे बनाम कुसुमजीत सिद्धू एवं अन्य” मामले में पारित किया गया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आंध्र प्रदेश की तर्ज पर सेवानिवृत्त जजों को घरेलू सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

किसे कितना मिलेगा भत्ता

नए प्रावधान के तहत:

  • सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस को घरेलू नौकर और चालक भत्ते के रूप में 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
  • सेवानिवृत्त जस्टिस को 45 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।
  • मोबाइल, लैंडलाइन, इंटरनेट, अनुसचिवीय सेवा और सुरक्षा सेवा के लिए 15 हजार रुपये प्रतिमाह अलग से मिलेंगे।

सरकार ने यह भी तय किया है कि इन भत्तों में हर वर्ष 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी।

किन शर्तों पर मिलेगा लाभ

सरकार ने इन सुविधाओं के लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं।

यह लाभ केवल उन्हीं सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मिलेगा जो:

  • किसी अन्य उच्च न्यायालय या सरकार से समान सुविधा नहीं ले रहे हों
  • सेवानिवृत्ति के बाद किसी न्यायाधिकरण, आयोग या सरकारी पद पर कार्यरत नहीं हों

इसके अलावा न्यायाधीश अपने विवेक से घरेलू नौकर या चालक का चयन स्वयं कर सकेंगे।

हाईकोर्ट से कर्मचारी लेने का विकल्प भी

यदि कोई सेवानिवृत्त जस्टिस चाहे तो हाईकोर्ट से दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारी या एक कर्मचारी और एक चालक की सेवा लेने का अनुरोध कर सकते हैं।

हालांकि ऐसी स्थिति में नकद भत्ते में कटौती का प्रावधान रखा गया है।

बिल के आधार पर होगा भुगतान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भत्तों का भुगतान वास्तविक खर्च के बिल प्रस्तुत करने के बाद ही अधिकतम सीमा तक किया जाएगा।

इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है और अब इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है।

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