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बिहार में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी कम क्यों? वोट ज्यादा, टिकट कम

वोटिंग में आगे महिलाएं, लेकिन सत्ता से दूर: बिहार की सियासत का सच

बिहार की राजनीति में महिलाएं हाशिये पर: वोटिंग में आगे, टिकट और नेतृत्व में पीछे

देशभर में महिला आरक्षण को लेकर सियासत तेज है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। बिहार में Bharatiya Janata Party, Janata Dal (United), Rashtriya Janata Dal और Indian National Congress—चारों प्रमुख दलों में महिलाओं की भागीदारी सीमित नजर आती है। वोटिंग में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं, लेकिन टिकट, संगठन और नेतृत्व में उनकी हिस्सेदारी अब भी बेहद कम है।


वोट ज्यादा, प्रतिनिधित्व कम

बिहार में पिछले कुछ चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। 2025 विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों से लगभग 9.8% ज्यादा मतदान किया।
इसके बावजूद विधानसभा और संसद में महिलाओं की संख्या 14% के आसपास सिमटी हुई है।


BJP: दावे बड़े, हिस्सेदारी छोटी

Bharatiya Janata Party महिला सशक्तिकरण की बात जरूर करती है, लेकिन बिहार में स्थिति अलग है:

  • 2024 लोकसभा चुनाव में एक भी महिला को टिकट नहीं
  • राज्यसभा में बिहार से सिर्फ 1 महिला सांसद
  • प्रदेश संगठन में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 15%

हालांकि, विधानसभा चुनाव में महिला उम्मीदवारों का सक्सेस रेट बेहतर (करीब 80%) रहा।


JDU: टिकट कम, संगठन में भी सीमित जगह

Janata Dal (United) ने भी महिलाओं को सीमित अवसर दिए:

  • लोकसभा में 2 महिलाओं को टिकट, दोनों जीतीं
  • विधानसभा में 13 महिला उम्मीदवार, 10 विजयी
  • संगठन में महिलाओं की हिस्सेदारी 10% से भी कम

राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी में भी महिलाओं की मौजूदगी बहुत कम है।


RJD: टिकट ज्यादा, लेकिन परिवार तक सीमित

Rashtriya Janata Dal ने अपेक्षाकृत ज्यादा महिलाओं को टिकट दिया:

  • लोकसभा में 6 महिला उम्मीदवार, सिर्फ 1 जीतीं
  • विधानसभा में 23 महिला उम्मीदवार, सिर्फ 3 सफल

पार्टी में महिलाओं की मौजूदगी दिखती जरूर है, लेकिन नेतृत्व ज्यादातर राजनीतिक परिवारों तक सीमित है—जैसे Rabri Devi और Misa Bharti


कांग्रेस: सबसे कमजोर स्थिति

Indian National Congress की स्थिति सबसे कमजोर नजर आती है:

  • लोकसभा में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं
  • विधानसभा में 5 महिलाओं को टिकट, कोई नहीं जीती
  • संगठनात्मक ढांचा भी अभी अधूरा

सवाल बड़ा: राजनीति में महिलाएं कहां?

बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का यह अंतर कई सवाल खड़े करता है:

  • जब महिलाएं वोटिंग में आगे हैं, तो टिकट में पीछे क्यों?
  • क्या राजनीतिक दल महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक मानते हैं?
  • क्या 33% आरक्षण के बिना बदलाव संभव है?

निष्कर्ष

बिहार की राजनीति में महिलाओं की भूमिका अभी भी सीमित है। आंकड़े साफ बताते हैं कि भागीदारी और प्रतिनिधित्व के बीच बड़ा अंतर है। जब तक राजनीतिक दल टिकट वितरण और संगठन में महिलाओं को बराबर हिस्सेदारी नहीं देंगे, तब तक “महिला सशक्तिकरण” का दावा अधूरा ही रहेगा।

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