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परिमल नाथवानी के नामांकन पर संकट टला, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियां की खारिज

झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है।

राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवानी के नामांकन पर संकट टला, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियां खारिज कीं

रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन पत्र के खिलाफ दायर सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए नामांकन को वैध घोषित कर दिया है। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव के लिए उनका चुनावी मैदान में बने रहना तय हो गया है।

रिटर्निंग ऑफिसर ने 10 जून 2026 को जारी अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि परिमल नाथवानी के खिलाफ उठाए गए किसी भी मुद्दे में ऐसा कोई आधार नहीं मिला, जिसके कारण उनका नामांकन रद्द किया जा सके। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह फैसला सुनाया गया।

NOC को लेकर आपत्ति खारिज

नामांकन की जांच के दौरान विरोधी पक्ष ने आरोप लगाया था कि उम्मीदवार ने सरकारी आवास से संबंधित नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) जमा नहीं किया है। हालांकि जांच में पाया गया कि आवश्यक प्रमाणपत्र पहले ही जमा किया जा चुका था। इसके बाद इस आपत्ति को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।

शेयरहोल्डिंग और संपत्ति छिपाने के आरोप पर भी राहत

विरोधियों ने यह भी आरोप लगाया था कि परिमल नाथवानी ने एक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी और वित्तीय हितों की पूरी जानकारी नहीं दी है। इस पर रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि नामांकन जांच के दौरान हलफनामे में दी गई जानकारी की सत्यता की विस्तृत जांच करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। चूंकि उम्मीदवार ने निर्धारित फॉर्म और शपथ पत्र जमा किया है, इसलिए यह नामांकन खारिज करने का आधार नहीं बनता।

नाम में अंतर को माना तकनीकी त्रुटि

नामांकन को लेकर सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवार के नाम को लेकर हुई। कुछ दस्तावेजों में “परिमल नाथवानी” और कुछ में “नाथवानी परिमल” दर्ज होने पर आपत्ति उठाई गई थी। रिटर्निंग ऑफिसर ने माना कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं और उपलब्ध दस्तावेज इसकी पुष्टि करते हैं। आदेश में कहा गया कि नाम के क्रम में अंतर महज तकनीकी त्रुटि है, जिसे गंभीर कानूनी कमी नहीं माना जा सकता।

फॉर्म-26 पर भी मिला क्लीन चिट

आश्रितों से जुड़े कुछ कॉलम खाली छोड़ने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। उम्मीदवार की ओर से स्पष्ट किया गया कि जो कॉलम लागू नहीं थे, उन्हें खाली छोड़ा गया था। बाद में संशोधित फॉर्म-26 भी जमा कर दिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए इसे नामांकन रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं माना।

चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हुआ

नामांकन वैध घोषित होने के बाद अब झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला और रोचक हो गया है। मैदान में महागठबंधन के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और प्रणव झा के साथ निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी चुनावी दौड़ में बने हुए हैं।

रिटर्निंग ऑफिसर ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि उम्मीदवार किसी भी संवैधानिक या कानूनी अयोग्यता की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसलिए सभी आपत्तियों को निरस्त करते हुए उनका नामांकन स्वीकार किया जाता है।

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