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Jharkhand: झारखंड में खनन के बाद नई शुरुआत, 45,000 हेक्टेयर कोयला खदानों की जमीन का दोबारा उपयोग, विकास को मिलेगी नई दिशा

Jharkhand: झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में से एक है। वर्षों से यहां कोयला खनन के कारण हजारों हेक्टेयर जमीन उपयोग से बाहर हो चुकी थी। अब राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों की पहल से लगभग 45,000 हेक्टेयर खनन भूमि के दोबारा इस्तेमाल की योजना बनाई जा रही है। यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी नई मजबूती देगा।

 

Jharkhand: झारखंड में खनन के बाद नई शुरुआत, 45,000 हेक्टेयर कोयला खदानों की जमीन का दोबारा उपयोग, विकास को मिलेगी नई दिशा
Jharkhand: झारखंड में खनन के बाद नई शुरुआत, 45,000 हेक्टेयर कोयला खदानों की जमीन का दोबारा उपयोग, विकास को मिलेगी नई दिशा

खनन भूमि के पुनः उपयोग की योजना

खनन के बाद बची जमीन अक्सर बंजर और अनुपयोगी हो जाती है। झारखंड में इस समस्या को अवसर में बदलने की तैयारी है। प्रस्ताव के तहत इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाएं, हरित औद्योगिक पार्क, कृषि आधारित गतिविधियां और इको-फ्रेंडली उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। इससे पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और कम कार्बन उत्सर्जन वाले औद्योगिक मार्गों को बढ़ावा मिलेगा।

 

भारत के नेट जीरो लक्ष्य में योगदान

भारत ने 2070 तक शुद्ध शून्य (नेट जीरो) कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। झारखंड में खनन भूमि का पुनः उपयोग इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा। खनन बंद होने के बाद कई इलाकों में बेरोजगारी बढ़ गई थी। जमीन के दोबारा उपयोग से नए उद्योग स्थापित होंगे, जिससे तकनीकी, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, स्थानीय व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

 

पर्यावरण सुधार और भूमि पुनर्जीवन

खनन से प्रभावित क्षेत्रों में जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण की समस्या आम रही है। पुनः उपयोग की योजना के तहत भूमि सुधार, वृक्षारोपण और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरणीय संतुलन में सुधार होगा। बंजर जमीन धीरे-धीरे उपयोगी और हरित क्षेत्रों में तब्दील हो सकेगी।

 

राज्य के लिए दीर्घकालिक लाभ और भविष्य की राह

झारखंड के लिए यह पहल केवल तात्कालिक विकास नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति है। इससे राज्य को निवेश के नए अवसर मिलेंगे, राजस्व में वृद्धि होगी और झारखंड को हरित विकास मॉडल के रूप में पहचान मिलेगी। खनन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर राज्य सतत विकास की ओर कदम बढ़ा सकेगा।

अगर यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो झारखंड देश के अन्य खनन राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सकता है। कोयला खदानों की जमीन का दोबारा इस्तेमाल यह साबित करेगा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

 

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