
झारखंड में मानसून की बेरुखी: जून में 60% कम बारिश, 15 जिलों में सूखे जैसे हालात
Ranchi: झारखंड में मानसून की रफ्तार इस बार बेहद सुस्त नजर आ रही है। जून माह में अपेक्षित बारिश नहीं होने से राज्य के अधिकांश जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 23 जून 2026 तक राज्य में सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी और खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ने लगा है।
राज्य में इस अवधि के दौरान औसतन 122.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षापात केवल 49.5 मिमी ही दर्ज किया गया। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
केवल रांची और दुमका में सामान्य के करीब बारिश
पूरे राज्य में सिर्फ दो जिले ऐसे हैं जहां बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है।
- रांची: सामान्य 125.7 मिमी के मुकाबले 119.6 मिमी बारिश (केवल 5% कमी)
- दुमका: सामान्य 130.7 मिमी के मुकाबले 108.4 मिमी बारिश (17% कमी)
इन दोनों जिलों को छोड़ अधिकांश जिलों में मानसून की कमी साफ दिखाई दे रही है।
सात जिलों में सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत कम बारिश
राज्य के कई जिलों में बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंची है।
इन जिलों में शामिल हैं:
- धनबाद – 49% कमी
- गिरिडीह – 49% कमी
- गुमला – 57% कमी
- जामताड़ा – 51% कमी
- रामगढ़ – 41% कमी
- सिमडेगा – 49% कमी
इन क्षेत्रों में किसानों को फसलों के लिए जल्द अच्छी बारिश का इंतजार है।
15 जिलों में सूखे जैसे हालात
सबसे चिंताजनक स्थिति राज्य के 15 जिलों में बनी हुई है, जहां सामान्य से 60 से 99 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
- गढ़वा – 99% कमी
- साहिबगंज – 98% कमी
- चतरा – 93% कमी
- लोहरदगा – 84% कमी
- पलामू – 84% कमी
- सरायकेला-खरसावां – 84% कमी
- खूंटी – 75% कमी
- गोड्डा – 74% कमी
- कोडरमा – 73% कमी
- लातेहार – 72% कमी
- पूर्वी सिंहभूम – 71% कमी
- पश्चिमी सिंहभूम – 68% कमी
- देवघर – 67% कमी
- पाकुड़ – 67% कमी
- बोकारो – 62% कमी
इन जिलों में कृषि कार्य प्रभावित होने लगे हैं और किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
खरीफ फसलों पर संकट के संकेत
मानसून की कमजोर शुरुआत का असर धान सहित खरीफ फसलों की बुआई पर दिखाई देने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कई इलाकों में खेती प्रभावित हो सकती है।
किसानों की निगाहें अब मौसम विभाग के पूर्वानुमान और मानसून की सक्रियता पर टिकी हैं।



