
मेदिनीनगर। पलामू का पोखराहा फोरलेन अब लोगों के बीच “मौत पॉइंट” के रूप में पहचान बनाने लगा है। गुरुवार को एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जब हाईवा और स्कूटी की टक्कर में पांकी थाना क्षेत्र के करार निवासी मजीद आलम की मौत हो गई। बीते 15 दिनों में इसी स्थान पर यह तीसरी मौत है। लगातार हो रहे हादसों ने न केवल स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि NHAI और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पोखराहा फोरलेन पर हाईवा और स्कूटी के बीच हुई जोरदार टक्कर में स्कूटी सवार मजीद आलम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें इलाज के लिए एमएमसीएच पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और आक्रोशित लोगों ने कुछ समय के लिए हाईवे जाम करने का प्रयास किया। लोगों का कहना है कि बार-बार हादसों के बावजूद न तो NHAI और न ही जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल कर रहा है।

आखिर क्यों बन गया पोखराहा ‘मौत पॉइंट’?
स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन निर्माण के दौरान पोखराहा और जोड़ जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में फ्लाईओवर या अंडरपास का निर्माण नहीं किया गया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क पार करने के लिए सीधे हाईवे का सहारा लेना पड़ता है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करना लोगों की मजबूरी बन गई है, जो अक्सर जानलेवा साबित हो रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, तो क्या NHAI ने यहां ट्रैफिक सर्वे, सुरक्षा ऑडिट या दुर्घटना विश्लेषण कराया है? यदि कराया गया है, तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसों के बाद प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर केवल लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। आखिर 15 दिनों में तीन मौतों के बाद भी यदि सुरक्षा इंतजाम नहीं बढ़ाए गए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या जिला प्रशासन ने NHAI को इस स्थल को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर सुरक्षा उपाय बढ़ाने का निर्देश दिया है? क्या यहां स्पीड लिमिट लागू कराने, स्पीड कैमरा लगाने, इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने दी आंदोलन की चेतावनी
झारखंड के पूर्व मंत्री कृष्णानंद त्रिपाठी (केएन त्रिपाठी) ने इस मामले में NHAI को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि पोखराहा और जोड़ में फ्लाईओवर का निर्माण नहीं होने के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे पूर्व में आंदोलन भी कर चुके हैं। उस समय तत्कालीन उपायुक्त शशि रंजन और NHAI के अधिकारियों ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। पूर्व मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द फ्लाईओवर निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो NHAI को उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।
जनता जवाब जानना चाहती है
आखिर पोखराहा फोरलेन पर और कितनी मौतों के बाद NHAI और जिला प्रशासन जागेगा? क्या लोगों की जान से बढ़कर कोई तकनीकी प्रक्रिया है? या फिर हर हादसे के बाद केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा?



